
कथित दुष्कर्म मामले में पूर्व मंत्री ने आरोपों को किया खारिज, भाजपा पर राजनीतिक साजिश रचने का लगाया आरोप; बोले- डीएनए जांच के लिए आज भी तैयार, मानहानि और अवमानना का मुकदमा भी करूंगा
देहरादून। असम की एक महिला की ओर से लगाए गए कथित दुष्कर्म के आरोपों को लेकर उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने शनिवार को कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को भाजपा की राजनीतिक साजिश करार देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर सीधा हमला बोला। रावत ने कहा कि इस राजनीतिक खेल की शुरुआत मुख्यमंत्री ने की है और इसका अंत उनकी विदाई के साथ होगा।
हरक सिंह रावत ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की न्याय यात्रा और प्रदेश में उठाए जा रहे जनहित के मुद्दों से भाजपा घबराई हुई है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की ओर से विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने और अमित शाह के हालिया कार्यक्रम में विरोध प्रदर्शन के बाद जनता का ध्यान भटकाने के लिए पुराने मामले को फिर से तूल दिया जा रहा है।
पूर्व मंत्री ने कहा कि दीपावली के अवसर पर भाजपा ने उन्हें यह मामला उठाकर एक अलग तरह का तोहफा दिया है। उनका आरोप है कि शिकायतकर्ता महिला को कुछ दिन पहले ही सुनियोजित तरीके से देहरादून लाया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी और उस समय केंद्र में भाजपा की सरकार थी। रावत के मुताबिक, जांच में उन्हें क्लीन चिट मिली थी और न्यायालय से भी उन्हें राहत मिली थी।
कानूनी कार्रवाई की दी चेतावनी
हरक सिंह रावत ने कहा कि इस मामले के जरिए उनकी सामाजिक और राजनीतिक छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। ऐसा करने वालों के खिलाफ वह कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने मानहानि और न्यायालय की अवमानना से संबंधित कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी। रावत ने कहा कि वह आज भी डीएनए जांच कराने के लिए तैयार हैं और जांच से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
प्रेस वार्ता में उन्होंने सीबीआई की कथित रिपोर्ट का हवाला देते हुए शिकायतकर्ता महिला के अतीत को लेकर भी कुछ दावे किए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण को अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग और प्रदेश में सामने आ रहे पेपर लीक जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है।
क्या है 23 साल पुराना मामला?
यह प्रकरण वर्ष 2003 का है, जब असम की एक नाबालिग लड़की ने उत्तराखंड के सरकारी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। उस समय बच्चे के पिता के रूप में तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत का नाम सामने आया था। विवाद बढ़ने के बाद रावत को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और मामले की सीबीआई जांच कराई गई थी। हरक सिंह रावत का दावा है कि जांच में उन्हें क्लीन चिट मिली थी।
अब करीब 23 साल बाद शिकायतकर्ता महिला के देहरादून पहुंचकर दोबारा गंभीर आरोप लगाए जाने से यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। महिला का दावा है कि घटना के समय उसकी उम्र महज 16 वर्ष थी और उस वक्त दबाव के चलते वह अपनी बात सामने नहीं रख सकी। उसने वर्ष 2016 में दिल्ली में भी शिकायत दर्ज कराने की बात कही है। महिला ने पूर्व में हुई जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं।
इस मामले में जहां शिकायतकर्ता महिला ने पुराने आरोपों को फिर से उठाया है, वहीं हरक सिंह रावत ने इन्हें राजनीतिक षड्यंत्र बताते हुए सभी आरोपों से इनकार किया है। ऐसे में 23 साल पुराने इस प्रकरण ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है।



