
भाजपा और कांग्रेस दोनों राष्ट्रीय दलों ने उत्तराखंड की जनता के साथ किया विश्वासघात, 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता दिखाएगी दोनों को बाहर का रास्ता
देहरादून। आम आदमी पार्टी की प्रदेश अध्यक्षा उमा गौड़ सिसोदिया ने जेनी हरक सिंह प्रकरण को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण ने कांग्रेस की कथनी और करनी के अंतर को उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि जो कांग्रेस आज जनता के सामने नैतिकता और महिला सम्मान की बातें करती है, उसे पहले अपने नेताओं और उनसे जुड़े विवादों पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। जेनी हरक सिंह प्रकरण में कांग्रेस की भूमिका और उसके नेताओं के रवैये ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उमा गौड़ सिसोदिया ने कहा कि उत्तराखंड की राजनीति में महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा का मुद्दा लगातार राजनीतिक दलों के लिए केवल बयानबाजी का विषय बनता जा रहा है। एक ओर कांग्रेस जेनी हरक सिंह प्रकरण को लेकर सवालों के घेरे में है, वहीं दूसरी ओर भाजपा सरकार अंकिता भंडारी हत्याकांड में उठ रहे सवालों का संतोषजनक जवाब देने में विफल रही है। अंकिता को न्याय दिलाने की मांग आज भी प्रदेश की जनता के मन में मौजूद है। इस संवेदनशील मामले में कथित वीआईपी की भूमिका और उसे लेकर उठे सवालों पर पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही राष्ट्रीय दलों ने उत्तराखंड की जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। चुनाव के समय महिला सम्मान, सुरक्षा और न्याय की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले ये दल सत्ता और राजनीति के हितों के सामने जनता के वास्तविक मुद्दों को पीछे छोड़ देते हैं।
प्रदेश अध्यक्षा ने कहा कि उत्तराखंड की जनता अब भाजपा और कांग्रेस दोनों की राजनीति को समझ चुकी है। प्रदेश की जनता को केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, बेटियों को न्याय और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था चाहिए। जनता अब इन दोनों दलों के दोहरे चरित्र का जवाब देने के लिए तैयार है।
उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड की जागरूक जनता भाजपा और कांग्रेस दोनों को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी और प्रदेश में बदलाव की राजनीति को मजबूत करेगी।
उमा गौड़ सिसोदिया ने अंत में कहा कि उत्तराखंड की जनता अब भाजपा और कांग्रेस के राजनीतिक खेल में उलझने वाली नहीं है। जनता को जवाब चाहिए कि महिलाओं को न्याय कब मिलेगा और बेटियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। 2027 का चुनाव इन दोनों राष्ट्रीय दलों के लिए जनता की अदालत साबित होगा।

