
सीबीआई जांच में तेजी और दोषियों को सजा दिलाने की उठी मांग, विभिन्न संगठनों ने किया प्रदर्शन
देहरादून । अंकिता भंडारी हत्याकांड में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर शुक्रवार को विभिन्न जनसंगठनों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनका पुतला दहन कर विरोध जताया।
सीपीआई (एम), सीटू, जनवादी महिला समिति, एसएफआई, जनवादी नौजवान सभा, उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद तथा राष्ट्रीय उत्तराखंड पार्टी के प्रतिनिधियों द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में कहा गया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड को चार वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पीड़ित परिवार को अब तक न्याय नहीं मिल सका है। संगठनों ने कहा कि सीबीआई जांच पूरी होने और दोषियों को सजा मिलने तक पीड़ित परिवार की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में सिक्किम के राज्यपाल पद पर दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति पर भी आपत्ति जताई गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जिस व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले में जांच चल रही हो, उसकी संवैधानिक पद पर नियुक्ति न्याय व्यवस्था और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने इसे पीड़ित परिवार तथा आम जनता की न्याय संबंधी अपेक्षाओं के विपरीत बताया।
संगठनों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले में दोषियों को अप्रत्यक्ष संरक्षण दिए जाने की आशंका पैदा हुई है। वक्ताओं ने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाय आरोपितों को संरक्षण देने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। इसी के विरोध में गृहमंत्री की उत्तराखंड यात्रा का विरोध करते हुए उनका पुतला दहन किया गया।
ज्ञापन में हत्याकांड की सीबीआई जांच शीघ्र पूरी कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाने, दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल नियुक्ति निरस्त करने, मामले में केंद्रीय गृहमंत्री की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने तथा पीड़ित परिवार को सुरक्षा व सम्मान सुनिश्चित करने की मांग की गई।
प्रदर्शन में जिलामंत्री शिवप्रसाद देवली, अनंत आकाश, लेखराज, दमयंती, नितिन मलेठा, नुरैशा, एस.एस. नेगी, भगवंत सिंह, रविंद्र कुमार, विप्लव, हरीश कुमार, गुरु प्रसाद पेटवाल और आनंदमणि सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।



