
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल लर्निंग का दिया जाएगा प्रशिक्षण
कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह बोले— शिक्षक राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण धुरी, उनके सतत व्यावसायिक विकास से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को मिलेगी नई दिशा
श्रीनगर (गढ़वाल) । हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में जवाहर नवोदय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए सोमवार को चार दिवसीय राष्ट्रीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) एवं राष्ट्रीय नवोदय नेतृत्व संस्थान, नोएडा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम 5 नवंबर तक चलेगा। इसमें उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के नवोदय विद्यालयों से आए 46 शिक्षक-शिक्षिकाएं प्रतिभाग कर रहे हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, नई तकनीकों और बदलती शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित करना है। उद्घाटन समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस दौरान अतिथियों का शॉल, स्मृति चिह्न एवं तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। शोधार्थी स्नेहलता ने विश्वविद्यालय के कुलगीत की सांकेतिक भाषा में प्रस्तुति देकर समावेशी शिक्षा का संदेश दिया।
कार्यक्रम की समन्वयक एवं IQAC की उपनिदेशक प्रो. सीमा धवन ने बताया कि कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित यह प्रशिक्षण सतत व्यावसायिक विकास की अवधारणा पर आधारित है। इसमें राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF), दक्षता आधारित शिक्षण, राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षक मानक (NPST), राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन (NMM), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अनुभवात्मक शिक्षण और डिजिटल लर्निंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

मुख्य अतिथि दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों का निरंतर व्यावसायिक विकास, भावनात्मक जुड़ाव और संस्थागत अपनत्व बेहद जरूरी है। शिक्षकों को भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और आधुनिक शैक्षिक दृष्टिकोण के समन्वय के साथ विद्यार्थियों में रचनात्मकता, नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं आलोचनात्मक चिंतन विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल विषयगत ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को संवेदनशील, दक्ष और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी उनका दायित्व है।
कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण धुरी हैं। उनके सतत व्यावसायिक विकास से ही शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और नई शैक्षिक दिशा का निर्माण संभव है। वर्तमान समय में शिक्षकों के लिए विषयगत ज्ञान के साथ तकनीकी दक्षता, व्यावहारिक कौशल और नवीन शिक्षण तकनीकों की समझ भी आवश्यक है। शिक्षकों को आधुनिक तकनीक एवं नवाचारों को कक्षा-कक्ष तक पहुंचाते हुए विद्यार्थियों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान के संवाहक नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी के चरित्र, विचार और सामाजिक चेतना के निर्माता भी हैं।
इस अवसर पर डीन नियुक्ति एवं प्रोन्नति प्रो. एम.एस. पंवार, बिरला परिसर के निदेशक प्रो. एच.बी.एस. चौहान और कुलसचिव प्रो. वाई.पी. रैवानी ने भी विचार रखे। प्रो. सुनीता गोदियाल ने चौरास स्थित टिहरी परिसर में बीपीएड पाठ्यक्रम शुरू करने की पहल के लिए कुलपति का आभार जताया। दिल्ली से पहुंचे प्रो. रजनी रंजन सौमित्र के प्रति भी विशेष आभार व्यक्त किया गया।

NCF और दक्षता आधारित शिक्षण पर हुई चर्चा
प्रथम तकनीकी सत्र में एससीईआरटी उत्तराखंड के विशेषज्ञ प्रदीप रावत ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा, दक्षता आधारित अधिगम एवं अधिगम प्रतिफल पर व्याख्यान दिया। उन्होंने मातृभाषा में शिक्षण, तकनीक के उपयोग, खेल-एकीकृत शिक्षण और विभिन्न विषयों के समेकित दृष्टिकोण पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दक्षता आधारित शिक्षण से विद्यार्थियों में ज्ञान, कौशल, आलोचनात्मक चिंतन और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित होती है। सतत आकलन एवं अनुभवात्मक शिक्षण को भी उन्होंने प्रभावी शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार बताया।
द्वितीय तकनीकी सत्र में अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली के डॉ. ऋषभ कुमार मिश्रा ने शिक्षक दक्षता एवं शिक्षण शास्त्र विषय पर व्याख्यान दिया। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय के माता सुंदरी कॉलेज की प्रो. रवनीत कौर ने भी शैक्षिक विषयों पर सत्र संचालित किए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनु राही ने किया। इस अवसर पर प्रो. एम.एम. सेमवाल, प्रो. आर.एस. नेगी, प्रो. गुड्डी बिष्ट, प्रो. वी.आर. पुरोहित, डॉ. शंकर सिंह, डॉ. सुमन लता तिरुवा, डॉ. सपना सेन, डॉ. रमेश राणा, डॉ. सिद्धार्थ लोहानी और डॉ. आलोक सागर गौतम सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक एवं शिक्षाविद् मौजूद रहे। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।





