
कांग्रेस नेता ने भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ यात्रा पर उठाए सवाल, बोले- त्योहार के दिन यातायात प्रतिबंधों से प्रभावित होगा कारोबार
देहरादून। प्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष एवं चकराता विधायक प्रीतम सिंह ने भाजपा की ओर से प्रदेश में निकाली जा रही ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ यात्रा पर सवाल उठाते हुए इसे हास्यास्पद करार दिया है। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी की केंद्र और राज्य दोनों जगह सरकारें हैं, वही पार्टी लोकतंत्र बचाने के लिए यात्रा निकाल रही है। आखिर लोकतंत्र को खतरा किससे है और प्रदेश में अराजकता के लिए जिम्मेदार कौन है, भाजपा को इसका जवाब देना चाहिए।
प्रीतम सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 6 नवंबर को प्रस्तावित देहरादून दौरे और पदयात्रा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि धनतेरस हिंदू समाज का महत्वपूर्ण पर्व है और इस दिन बाजारों में भारी चहल-पहल रहती है। लोग बड़ी संख्या में खरीदारी के लिए घरों से निकलते हैं। ऐसे में गृह मंत्री के कार्यक्रम के मद्देनजर शहर में होने वाले यातायात प्रतिबंधों, रूट डायवर्जन और सुरक्षा इंतजामों से आम जनता के साथ-साथ व्यापारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक नवंबर को विपक्षी दलों की ओर से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में रामलीला मैदान में आयोजित रैली को लेकर व्यापारियों के कारोबार प्रभावित होने की बात कही जा रही थी, तो क्या 6 नवंबर को देहरादून में गृह मंत्री के कार्यक्रम और पदयात्रा से व्यापारियों के कारोबार पर असर नहीं पड़ेगा? उन्होंने कहा कि धनतेरस व्यापारियों के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी दिनों में से एक है। ऐसे समय में प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रतिबंध और सुरक्षा व्यवस्था के कारण ग्राहकों को बाजारों तक पहुंचने में दिक्कत हो सकती है, जिसका सीधा असर व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ेगा।
प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा को आम जनता की परेशानियों और व्यापारियों के हितों से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा को लोकतंत्र और अराजकता की चिंता करने से पहले अपने शासनकाल की नीतियों और कार्यों पर आत्ममंथन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल यात्राएं निकालने और नारे लगाने से मजबूत नहीं होता, बल्कि जनता के अधिकारों का सम्मान करने, लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने और आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान करने से मजबूत होता है। राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करना किसी भी दल का अधिकार है, लेकिन त्योहारों के दौरान आम जनता की सुविधाओं, व्यापारियों के हितों और बाजारों की गतिविधियों का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।




