
218 डायग्नोस्टिक केंद्रों के नियमित निरीक्षण के निर्देश, भ्रूण लिंग जांच करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
देहरादून। जिले में गिरते लिंगानुपात को सुधारने और कन्या भ्रूण हत्या जैसी अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था सख्त करने का निर्णय लिया है। कम लिंगानुपात वाले गांवों को चिह्नित कर रेड जोन में शामिल किया जाएगा। साथ ही अल्ट्रासाउंड केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने और गर्भवती महिलाओं की प्रभावी ट्रैकिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में आयोजित पीसीपीएनडीटी जिला सलाहकार समिति की बैठक में जिले के लिंगानुपात की समीक्षा की गई। स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) के वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड का लिंगानुपात 939, जबकि देहरादून का 927 दर्ज किया गया। इस अंतर पर चिंता जताते हुए जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को प्रत्येक गांव के पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण कर असामान्य लिंगानुपात वाले क्षेत्रों की पहचान करने के निर्देश दिए।
डोईवाला और कालसी में सबसे कम लिंगानुपात
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि जिले का लिंगानुपात इस वर्ष 927 से बढ़कर 937 हो गया है। हालांकि, क्षेत्रवार आंकड़ों में डोईवाला और कालसी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। वर्ष 2026-27 के आंकड़ों के अनुसार डोईवाला में 885, कालसी में 887, सहसपुर में 924, रायपुर में 949, विकासनगर में 1000 और चकराता में 1060 लिंगानुपात दर्ज किया गया है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि कम लिंगानुपात वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाए और संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रूण के लिंग की जांच कराने या करने वालों के खिलाफ पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
218 केंद्रों में 420 अल्ट्रासाउंड मशीनें
सीएमओ ने बताया कि जिले में वर्तमान में 218 क्रियाशील डायग्नोस्टिक एवं इमेजिंग केंद्र संचालित हैं, जिनमें 420 अल्ट्रासाउंड मशीनें स्थापित हैं। जिला निरीक्षण एवं मूल्यांकन समिति ने सितंबर माह में 84 केंद्रों और वर्ष 2026 में अब तक कुल 117 केंद्रों का निरीक्षण किया है। मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर तीन केंद्रों की अल्ट्रासाउंड मशीनें सील की गई हैं।
जिलाधिकारी ने सभी केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने के साथ गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग व्यवस्था प्रभावी बनाने के निर्देश दिए, ताकि अवैध गतिविधियों पर समय रहते रोक लगाई जा सके।
मानक पूरे होने पर ही मिलेगा पंजीकरण
बैठक में 10 नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण और 18 केंद्रों के नवीनीकरण के आवेदनों पर भी चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अनुमति देने से पहले उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रमाण पत्र, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की अनापत्ति, अग्निशमन सुरक्षा प्रमाण पत्र और जैव चिकित्सा अपशिष्ट निस्तारण संबंधी अनुबंध की जांच अनिवार्य रूप से की जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित मानकों और आवश्यक दस्तावेजों को पूरा करने वाले केंद्रों को ही पंजीकरण या नवीनीकरण की अनुमति दी जाएगी। बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) केके मिश्रा, पीसीपीएनडीटी के जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. बिमलेश जोशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सक, रेडियोलॉजिस्ट, जिला शासकीय अधिवक्ता और समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।



