
देहरादून। हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने एमबीबीएस दाखिलों में चल रहे फर्जीवाड़े पर बड़ा शिकंजा कसा है। नीट यूजी-2026 की काउंसलिंग के पहले और दूसरे दौर (Round-I & II) में फर्जी या गलत निवास (डोमिसाइल), श्रेणी (Category) और उप-श्रेणी (Sub-category) के प्रमाण पत्रों के आधार पर सीटें हासिल करने वाले 15 अभ्यर्थियों का अनंतिम सीट आवंटन (Provisional Allotment) रद्द कर दिया गया है।
दस्तावेज़ सत्यापन में हुआ बड़ा खुलासा
विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, प्रवेश प्रक्रिया के दौरान संबंधित संस्थानों के प्राचार्यों और जिला मजिस्ट्रेटों के माध्यम से अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों का गहन सत्यापन कराया गया था। जिला प्रशासनों से प्राप्त सत्यापन रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि कई छात्रों ने नियमों को ताक पर रखकर गलत दस्तावेजों के बल पर सीटें हथिया ली थीं। जांच रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन सभी 15 अभ्यर्थियों के आवंटन को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी सूची के मुताबिक, जिन प्रमुख संस्थानों में फर्जी दस्तावेजों के जरिए दाखिले का प्रयास किया गया उनमें शामिल हैं:
जीएमसी हल्द्वानी (परी, अनुराग भोजवाल, अलसामी फैजल, प्रभात चौधरी, वाइनवी कुमार, आदि)
वीसीएसजी श्रीनगर (खुशी, दीक्षा कुमारी, वैष्णवी सिंह, अवंतिका डवास, दक्ष चतुर्वेदी)
जीएमसी हरिद्वार (तृप्ति, चित्रा, दक्ष चतुर्वेदी)
जीएमसी अल्मोड़ा (प्रियांशु गुप्ता)
जीडीएमसी दून (काजल भारद्वाज, दीपांशु)
इन सभी अभ्यर्थियों का आवंटन रद्द होने के बाद अब इन सीटों पर उनका कोई दावा नहीं रहेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिलाधिकारियों से मिलने वाली आगामी सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर काउंसलिंग पोर्टल पर सूचियां समय-समय पर और भी अपडेट की जाएंगी।
मेधावी छात्रों के अधिकारों पर प्रहार
पैसों और फर्जीवाड़े के बल पर गरीबों और योग्य तथा मेहनती छात्रों के हक पर डाका डालने वाले ऐसे मामलों को लेकर शिक्षा जगत और आम जनता में भारी आक्रोश है।
शिक्षाविदों का मानना है कि इस तरह के कृत्यों में लिप्त लोगों और फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वाले रैकेट पर केवल दाखिला रद्द करने तक सीमित न रहकर, उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई और आपराधिक मुकदमे दर्ज होने चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी छात्र या अभिभावक ऐसा करने की हिम्मत न जुटा सके।




