
लाडपुर-जोगीवाला बाईपास से बद्रीश कॉलोनी तक जगह-जगह कचरे के ढेर, घरों से लेकर निर्माण सामग्री तक जंगल में फेंकी जा रही; स्थानीय लोगों में नाराजगी
कभी सेल्फी प्वाइंट था देहरादून का यह खूबसूरत इलाका, अब साल के जंगलों में लग रहे कूड़े के ढेर
देहरादून। कभी साल के घने और हरे-भरे जंगलों के बीच से गुजरने वाली देहरादून की रिंग रोड और उससे जुड़ी संपर्क सड़कें अब धीरे-धीरे कूड़े के बढ़ते ढेरों से घिरती जा रही हैं। लाडपुर चौक से जोगीवाला की ओर हरिद्वार बाईपास और रिंग रोड की शुरुआत से लेकर आसपास की कई सड़कों के किनारे बिखरा कचरा न केवल क्षेत्र की खूबसूरती को प्रभावित कर रहा है, बल्कि पर्यावरण और स्थानीय आबादी के लिए भी चिंता का विषय बनता जा रहा है।
जब रिंग रोड का निर्माण हुआ था, उस समय सड़क के दोनों ओर फैले साल के हरे-भरे जंगल इस मार्ग की पहचान हुआ करते थे। राहगीर यहां रुककर प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते और तस्वीरें खींचते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सड़क के किनारे जंगलों में जगह-जगह कचरा जमा होने से इस प्राकृतिक सौंदर्य का स्वरूप बदलता नजर आ रहा है।
लाडपुर क्षेत्र में काली मंदिर से आगे चढ़ाई पर रक्षा मंत्रालय की CQAI आवासीय कॉलोनी के समीप से निकलने वाली सड़क भी साल के जंगलों के बीच से होकर रिंग रोड से जुड़ती है। इसी तरह होटल पर्ल एवेन्यू के सामने से बद्रीश कॉलोनी की ओर जाने वाली सड़क तथा सूचना भवन के सामने पूर्व भाजपा कार्यालय के लिए आवंटित भूमि के पीछे से गढ़वाली कॉलोनी की ओर जाने वाला मार्ग भी जंगल से सटे हुए हैं। इन मार्गों के आसपास भी जगह-जगह कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल में ऐसे कई लोगों के बारे में जानकारी सामने आई जो अपने घरों का कचरा वाहनों में लेकर इन सुनसान सड़क किनारे क्षेत्रों में डालते हैं। बताया गया कि कुछ लोग बच्चों को स्कूल छोड़ने या अपने कार्यालय जाने के दौरान भी रास्ते में कूड़ा जंगल के किनारे फेंक देते हैं। धीरे-धीरे यही कचरा छोटे-छोटे ढेरों का रूप ले रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार केवल घरेलू कचरा ही समस्या नहीं है। होटल, टेंट व्यवसाय तथा निर्माण कार्यों से निकलने वाला मलबा और कंक्रीट वेस्ट भी कई स्थानों पर जंगल के आसपास डाले जाने की शिकायत है। कुछ जगहों पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों से भी कचरा लाकर डालने की बात सामने आई है।
बद्रीश कॉलोनी के कुछ निवासियों ने बताया कि सड़क किनारे लगातार बढ़ रहे कचरे से वे परेशान हैं। उनका कहना है कि कई स्थानों पर स्थिति ऐसी हो गई है कि दुर्गंध के कारण बिना नाक ढके वहां से गुजरना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई कि क्षेत्र की वार्ड सदस्य इस समस्या को संबंधित अधिकारियों के सामने उठाकर समाधान कराने की पहल करेंगी।
मौके पर स्थिति का जायजा लेने के दौरान एक और गंभीर पहलू सामने आया। स्थानीय स्तर पर यह आरोप है कि कुछ स्थानों पर सफाई के दौरान एकत्रित कचरे को पूरी तरह हटाने के बजाय जंगल के भीतर मौजूद गड्ढेनुमा स्थानों में ही डाला जा रहा है। यदि ऐसा हो रहा है तो यह समस्या के समाधान के बजाय कचरे को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने जैसा होगा और साल के जंगलों के लिए इसके गंभीर पर्यावरणीय परिणाम हो सकते हैं।
इस संबंध में जब सड़क के दोनों और जंगल की तरफ लोहे की ऊंची जालियां लगवाने के संबंध में नगर निगम महापौर से बात की गई तो उनका कहना था कि संबंधित क्षेत्र वन विभाग के कार्यक्षेत्र में आता है, इसलिए नगर निगम की भूमिका सफाई तक सीमित है। हालांकि स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि जंगल के किनारे सड़क पर लगातार कचरा फेंका जा रहा है तो संबंधित विभाग आपसी समन्वय से इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं तलाश सकते ?

स्थानीय नागरिकों का सुझाव है कि संवेदनशील स्थानों पर मजबूत जालियां या अन्य अवरोधक लगाए जाएं, नियमित निगरानी की व्यवस्था हो और कचरा फेंकने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि जंगल को डंपिंग ग्राउंड बनने से रोका जा सके।
मेरो उत्तराखंड न्यूज़ की टीम ने इन क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया और सड़क के दोनों ओर मौजूद कूड़े की स्थिति को कैमरे में दर्ज किया है। संबंधित फोटो और वीडियो के माध्यम से इस समस्या को प्रशासन और संबंधित विभागों के संज्ञान में लाने का प्रयास किया जा रहा है।
साल के जंगलों से घिरे ये मार्ग यदि समय रहते साफ नहीं किए गए और कचरा डालने पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। अब जरूरत इस बात की है कि नगर निगम, वन विभाग और जिला प्रशासन मिलकर जिम्मेदारी तय करें और इन मार्गों को कूड़ा फेंकने का स्थान बनने से रोकने के लिए ठोस कार्रवाई करें।



