
मसूरी की वहन क्षमता पर उठे सवाल, 2023 की रिपोर्ट के 19 उपायों पर अमल नहीं, हाईकोर्ट पहुंचे सिटिजन्स फॉर ग्रीन दून और अनूप नौटियाल
रोपवे, सुरंग और एलिवेटेड कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं पर आपत्ति, पर्यटकों की संख्या 255 प्रतिशत बढ़ी
देहरादून। ‘पहाड़ों की रानी’ मसूरी पर बढ़ते बोझ को लेकर ‘सिटिजन्स फॉर ग्रीन दून’ और अनूप नौटियाल ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। संगठन का कहना है कि मसूरी की वहन क्षमता (कैरिंग कैपेसिटी) को लेकर दो दशक से चेतावनियां दी जा रही हैं, लेकिन न कोई नीतिगत बदलाव हुआ और न ही शहर के प्रबंधन की कोई ठोस योजना बनी। उलटे, शहर में नई बुनियादी परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है। इसी को लेकर सितंबर 2026 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है।
22 साल पुरानी चेतावनी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि वर्ष 2001 में LBSNAA ने सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी (SCMC) के प्रायोजन से मसूरी की धारण क्षमता पर अध्ययन किया था। उसका सबसे अहम निष्कर्ष था कि शहर में अब और निर्माण संभव नहीं है और इसकी भौगोलिक स्थिति अपनी भौतिक सीमाओं की चरम सीमा तक पहुंच चुकी है।
जनवरी 2023 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने हिमालयी पहाड़ी कस्बों की पारिस्थितिक नाजुकता और वहन क्षमता के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया। यह मामला ‘द ट्रिब्यून’ में 16 जनवरी 2023 को छपी खबर ‘जोशीमठ आपदा मसूरी के लिए एक चेतावनी’ के आधार पर दर्ज हुआ। NGT ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति बनाई, जिसमें वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी जैसे संस्थान भी शामिल थे। समिति ने जुलाई 2023 में ‘स्टेटस रिपोर्ट: कैरिंग कैपेसिटी ऑफ मसूरी’ पेश की।
रिपोर्ट के आंकड़े, जिन पर उठे सवाल
- पर्यटक: वर्ष 2000 में करीब 8.5 लाख से बढ़कर 2019 में 30.23 लाख से अधिक हुए, यानी दो दशक में लगभग 255 प्रतिशत की वृद्धि।
- सड़क और पार्किंग: सड़क नेटवर्क 1990 के 219 किमी से बढ़कर 2023 में करीब 585 किमी हो गया, लेकिन सभी एजेंसियों को मिलाकर केवल 1,240 निर्धारित पार्किंग स्थल हैं। पीक सीजन और लंबे सप्ताहांत पर जाम इसी असंतुलन का नतीजा है।
- आबादी का दबाव: 2011 की जनगणना के मुताबिक स्थायी आबादी 30,118 और घनत्व 511 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है, जो पीक सीजन में करीब 1,000 तक पहुंच जाता है।
- निर्माण: शहर में लगभग 510 आवास इकाइयां हैं, जिनमें 303 होटल और 201 होमस्टे हैं। इनकी कुल क्षमता 17,470 बिस्तरों की है। इसके अलावा 18 नए निर्माण और 419 पुनर्निर्माण व नवीनीकरण के कार्य हुए।
- भूवैज्ञानिक खतरा: रिपोर्ट के अनुसार मसूरी का करीब 44 प्रतिशत हिस्सा भूस्खलन और भू-धंसाव के लिहाज से ‘उच्च’ से ‘मध्यम’ जोखिम वाले क्षेत्र में है। मेन बाउंड्री थ्रस्ट शहर के ठीक दक्षिण में स्थित है।
- पानी: मांग उपलब्ध आपूर्ति से कहीं ज्यादा है और गर्मियों में किल्लत होती है। वर्ष 2000 के एक अध्ययन के मुताबिक जलस्रोत 120 से घटकर 20 रह गए।
- कचरा और सीवेज: भीड़ के समय ठोस कचरे और सीवेज की मात्रा बढ़ जाती है, लेकिन उपचार ढांचा नाकाफी है, जिससे प्रदूषण और स्थानीय इकोसिस्टम को नुकसान हो रहा है।
- स्वास्थ्य सेवाएं: पीक सीजन में लाखों लोगों के लिए केवल 18 स्वास्थ्य सुविधाएं हैं, जिनमें करीब 63 बिस्तर ही उपलब्ध हैं।
19 उपाय, पर अमल नहीं
रिपोर्ट में समस्या के समाधान और संसाधनों की बेहतर योजना के लिए 19 निवारक और सुधारात्मक उपाय सुझाए गए थे। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इसके बावजूद कोई नीतिगत बदलाव या योजना नहीं बनी। उनका कहना है कि सरकार का जोर बुनियादी ढांचे के विस्तार पर है, जिसका मकसद लोगों को मसूरी तक लाना है, जबकि ट्रैफिक, पार्किंग, कचरा प्रबंधन, जल संसाधन और पर्यावरण की गुणवत्ता के प्रबंधन की कोई योजना या व्यवस्था नहीं है।
उनके मुताबिक दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के खुलने से सामान्य दिनों में भी पर्यटकों की आमद अचानक बढ़ी है। इसी बीच जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट के पास प्रस्तावित सुरंगें, लांबीधार-किमाड़ी सड़क का चौड़ीकरण, डूंगा-मिसरास्पत्ती वैकल्पिक सड़क, मसूरी रोपवे परियोजना और रिस्पना-बिंदल एलिवेटेड कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है।
NGT का आदेश और सरकार से सवाल
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि 26 जुलाई 2023 के आदेश में NGT ने सिर्फ सिफारिशें दर्ज नहीं कीं, बल्कि राज्य सरकार को समयबद्ध कार्ययोजना बनाने, जिम्मेदार एजेंसियों की पहचान करने, मुख्य सचिव स्तर पर त्रैमासिक निगरानी और नामित वरिष्ठ नोडल अधिकारी से मासिक समीक्षा कराने का निर्देश भी दिया था।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार की अपनी समिति ने ये 19 उपाय जरूरी माने हैं, तो अतिरिक्त बुनियादी परियोजनाओं को आगे कैसे बढ़ाया जा सकता है, जबकि यह साबित ही नहीं किया गया कि वे इन उपायों और शहर की कैरिंग कैपेसिटी के अनुरूप हैं।
मुख्य सचिव से मिलेंगे याचिकाकर्ता
याचिका में हाईकोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है, ताकि अनियोजित विकास पर रोक लगे, 2023 की रिपोर्ट की सिफारिशें लागू हों और हिमालय का नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र वर्तमान व आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहे। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार याचिकाकर्ताओं को मुख्य सचिव के समक्ष अपने सुझाव रखने हैं, ताकि मसूरी की कैरिंग कैपेसिटी के अनुरूप विकास कार्य हो सकें। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे जल्द ही इस सिलसिले में मुख्य सचिव से मुलाकात करेंगे।



