
उत्तरकाशी। उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा अब शीतकालीन पड़ाव की ओर बढ़ रही है। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने की तिथियां और शुभ मुहूर्त निर्धारित कर दिए गए हैं। गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर को अन्नकूट पर्व पर दोपहर 12 बजकर 5 मिनट पर बंद किए जाएंगे, जबकि यमुनोत्री धाम के कपाट 11 नवंबर को भैया दूज के अवसर पर सुबह 10 बजकर 28 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद होंगे। दोनों धामों में कपाटबंदी की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इन धार्मिक आयोजनों के साथ ही ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में नियमित चारधाम यात्रा का समापन हो जाएगा।
गंगोत्री मंदिर समिति ने शारदीय नवरात्र की नवमी के अवसर पर पूजा-अर्चना के बाद कपाट बंद करने का मुहूर्त निर्धारित किया। मंदिर समिति के अध्यक्ष धर्मानंद सेमवाल और सचिव सुरेश सेमवाल के अनुसार, 10 नवंबर को अन्नकूट एवं गोवर्धन पूजा के अवसर पर अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:05 बजे मंदिर के कपाट बंद किए जाएंगे। इससे पहले मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होगी और मां गंगा से क्षेत्र की सुख-समृद्धि तथा श्रद्धालुओं के कल्याण की कामना की जाएगी।
कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की उत्सव डोली पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव के लिए रवाना होगी। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, डोली की विदाई के दौरान मां गंगा के जयकारे गूंजेंगे और सेना के बैंड की धुनों के बीच यह यात्रा आगे बढ़ेगी। 11 नवंबर को भैया दूज के पावन अवसर पर डोली मुखबा पहुंचेगी। इसके बाद शीतकाल के दौरान श्रद्धालु मुखबा स्थित गंगा मंदिर में मां गंगा के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
उधर, यमुनोत्री धाम के कपाट बंद करने की तिथि और समय भी तय कर लिया गया है। विजयदशमी के अवसर पर मंदिर समिति और पुरोहित समाज की मौजूदगी में हुई बैठक में पंचांग एवं धार्मिक परंपराओं के अनुसार कपाटबंदी का मुहूर्त निकाला गया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 11 नवंबर को भैया दूज पर सुबह 10 बजकर 28 मिनट पर अनुराधा नक्षत्र और सौम्य धनु लग्न में विधि-विधान के साथ यमुनोत्री मंदिर के कपाट बंद किए जाएंगे। इसके बाद मां यमुना की शीतकालीन पूजा उनके निर्धारित शीतकालीन प्रवास स्थल परंपरानुसार जारी रहेगी और श्रद्धालु वहां दर्शन कर सकेंगे।
गंगोत्री और यमुनोत्री धाम उत्तरकाशी जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हैं। हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां गंगा और मां यमुना के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। सर्दियों में भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम की आशंका के चलते दोनों धामों के कपाट परंपरागत रूप से बंद कर दिए जाते हैं। इस अवधि में देव डोलियों और निर्धारित शीतकालीन पूजा स्थलों पर धार्मिक अनुष्ठान जारी रहते हैं। दोनों धामों की कपाटबंदी उत्तराखंड की धार्मिक आस्था, लोक परंपराओं और हिमालयी संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है।



