
विजयदशमी पर मंदिर समिति ने घोषित की कपाट बंद होने की तिथि, 17 नवंबर से शीतकालीन प्रवास पर रवाना होंगी भगवान की उत्सव डोलियां और गद्दियां
बदरीनाथ । विश्वप्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के कपाट इस वर्ष 16 नवंबर, सोमवार को रात 9 बजकर 37 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। विजयदशमी के अवसर पर बदरीनाथ मंदिर परिसर में आयोजित धार्मिक समारोह में वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और पंचांग गणना के बाद कपाट बंद करने की तिथि की विधिवत घोषणा की गई। कपाट बंद होने से पहले 12 नवंबर से पंच पूजाओं का क्रम शुरू होगा। इसके बाद भगवान बदरीविशाल से जुड़ी उत्सव डोलियां और आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अपने शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना होंगी।
कपाट बंद होने की तिथि की घोषणा बदरीनाथ धाम के रावल अमरनाथ नंबूदरी ने मंदिर समिति के पदाधिकारियों और अधिकारियों की मौजूदगी में की। इससे पहले धर्माधिकारी आचार्य स्वयंवर सेमवाल तथा वेदपाठी आचार्य डॉ. रवीन्द्र भट्ट और आचार्य वाणी विलास डिमरी ने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए। मंदिर परिसर में नवरात्रि और उर्वशी माता की पूजा का समापन भी हवन-यज्ञ के साथ हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना में भाग लिया।
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने विजयदशमी पर देश-विदेश के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि कपाट बंद होने से पहले बड़ी संख्या में तीर्थयात्री बदरीनाथ, केदारनाथ और आसपास के धार्मिक स्थलों के दर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि चारधाम के कपाट बंद होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में शीतकालीन धार्मिक यात्रा को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि श्रद्धालु सर्दियों में भी उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन कर सकें।
बीकेटीसी के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ के अनुसार, बदरीनाथ धाम में कपाट बंद होने से पहले होने वाली पंच पूजाओं का कार्यक्रम भी निर्धारित कर दिया गया है। 12 नवंबर को भगवान गणेश की पूजा होगी। 13 नवंबर को आदि केदारेश्वर मंदिर और आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद किए जाएंगे। 14 नवंबर को खड्ग-पुस्तक पूजन के साथ वेद ऋचाओं का वाचन संपन्न होगा। 15 नवंबर को माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग अर्पित कर भगवान बदरीविशाल के दरबार में आने का निमंत्रण दिया जाएगा। अंतिम दिन 16 नवंबर को माता लक्ष्मी गर्भगृह में प्रवेश करेंगी, जबकि भगवान कुबेर और उद्धव जी मंदिर परिसर में विराजमान होंगे। इसके बाद निर्धारित मुहूर्त पर रात 9 बजकर 37 मिनट पर बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
कपाट बंद होने के अगले दिन 17 नवंबर को भगवान उद्धव और कुबेर जी की उत्सव डोलियां योग बदरी, पांडुकेश्वर के लिए प्रस्थान करेंगी। शीतकाल में यहां दोनों की पूजा-अर्चना की जाएगी। वहीं, भगवान गरुड़ और आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी से जुड़ी परंपराओं के तहत ज्योतिर्मठ स्थित नृसिंह मंदिर में शीतकालीन पूजा की व्यवस्था होगी। आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी 17 नवंबर को पांडुकेश्वर में प्रवास करेगी और 18 नवंबर को ज्योतिर्मठ स्थित नृसिंह मंदिर में विराजमान होगी। इन धार्मिक परंपराओं के संपन्न होने के साथ वर्ष 2026 की बदरीनाथ धाम यात्रा का समापन हो जाएगा।
इस अवसर पर मंदिर समिति की ओर से आगामी यात्रा वर्ष 2027 के लिए बदरीनाथ धाम की भंडार व्यवस्था के संचालन से जुड़े लोगों को पगड़ी भेंट कर सम्मानित किया गया। मेहता थोक से उमेश भट्ट और शिवम मेहता तथा कमदी-भंडारी थोक से महेंद्र भंडारी और जगदीश पंवार को यह सम्मान दिया गया। कार्यक्रम में बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, अन्य पदाधिकारी, मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़, पूर्व पदाधिकारी, मंदिर अधिकारी, तीर्थ पुरोहित, हक-हकूकधारी संगठनों के प्रतिनिधि और सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
उधर, चारधाम यात्रा के अन्य प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद होने की तिथियां भी घोषित की जा चुकी हैं। केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को भैयादूज पर सुबह 8 बजकर 30 मिनट पर बंद होंगे। यमुनोत्री धाम के कपाट भी इसी दिन बंद किए जाएंगे, जबकि गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा के अवसर पर शीतकाल के लिए बंद होंगे। इसके साथ ही चारधाम यात्रा का नियमित चरण समाप्त हो जाएगा और शीतकालीन पूजा-अर्चना की परंपराएं शुरू होंगी।



