
देहरादून। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच आरोप-प्रत्यारोप का विवाद लगातार गहरा रहा है। इस मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आरोप लगाने भर से किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता; दोष का निर्णय जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।
मुख्यमंत्री धामी ने भाजपा प्रदेश मुख्यालय, देहरादून में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि इस मामले में यह भी देखना होगा कि आरोप किन परिस्थितियों में सामने आए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दोनों 22 वर्षों से साथ रहे हैं, तो इतने लंबे समय बाद आरोप क्यों लगाए गए।उन्होंने कहा कि आरोपों की सच्चाई केवल निष्पक्ष जांच से ही स्थापित हो सकती है। उनके अनुसार किसी को राजनीतिक दृष्टि से दोषी ठहराना उचित नहीं है और दंड का निर्णय कानून ही करेगा।
वायरल ऑडियो रिकॉर्डिंग के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बातचीत में किसी का नाम आ जाना उस व्यक्ति के संलिप्त होने का प्रमाण नहीं बन जाता। उन्होंने कहा कि ऑडियो या बयानों को अंतिम सत्य मानने से पहले उनकी जांच आवश्यक है।
सीएम धामी ने कहा कि ऐसे मामलों में जांच इस तरह होनी चाहिए कि निर्दोष को बचाया जाए और वास्तविक दोषी कानून के दायरे में आए। उन्होंने “दूध का दूध, पानी का पानी” होने पर जोर दिया।
मंत्री रेखा आर्या ने पिछले दिनों देहरादून के कैंट थाने में पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ मारपीट, उत्पीड़न, धोखाधड़ी और हत्या की साजिश सहित गंभीर आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
इसके बाद गिरधारी लाल साहू ने वीडियो जारी कर रेखा आर्या पर करीब 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले की जांच की मांग की थी।मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है, जो आरोपों और साक्ष्यों की पड़ताल कर रहा है।
मुख्यमंत्री के बयान से संकेत है कि सरकार इस विवाद में किसी पक्ष को बिना जांच के दोषी नहीं मानना चाहती। सरकार का स्पष्ट रुख है कि निर्णय आरोपों पर नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।



