
2 नवंबर की रैली को सफल बनाने के लिए NOPRUF महिला मोर्चा ने बनाई रणनीति, प्रदेश के सभी 13 जनपदों की महिलाओं ने लिया हिस्सा
देहरादून। पुरानी पेंशन बहाली की मांग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा (NOPRUF) उत्तराखंड महिला मोर्चा ने अनूठी पहल की है। करवा चौथ के अवसर पर प्रदेशभर में ‘OPS के नाम की मेहंदी’ अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत महिलाएं अपने हाथों पर OPS और ‘पुरानी पेंशन बहाल करो’ जैसे संदेश मेहंदी के माध्यम से उकेरकर पुरानी पेंशन बहाली की मांग को आवाज देंगी। अभियान को सोशल मीडिया के माध्यम से भी व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जाएगा।
इस संबंध में महिला मोर्चा की महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रदेश महिला अध्यक्ष रानीता प्रसाद विश्वकर्मा ने की। बैठक में प्रदेश, मंडल, जनपद एवं ब्लॉक स्तर की महिला पदाधिकारियों, सदस्यों और कार्यकर्ताओं के साथ मोर्चा के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने प्रतिभाग किया। बैठक में आगामी करवा चौथ पर अभियान को प्रदेशव्यापी स्वरूप देने के साथ ही 2 नवंबर को देहरादून में प्रस्तावित पुरानी पेंशन बहाली रैली की तैयारियों पर भी चर्चा की गई।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पुरानी पेंशन केवल कर्मचारियों का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके परिवार की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक भविष्य से जुड़ा सवाल है। ऐसे में कर्मचारी परिवारों की महिलाओं को भी इस आंदोलन से सक्रिय रूप से जोड़ने की आवश्यकता है।
प्रदेश महिला अध्यक्ष रानीता प्रसाद विश्वकर्मा ने कहा कि करवा चौथ प्रेम, विश्वास और परिवार की खुशहाली का पर्व है। इस बार महिलाएं अपनी मेहंदी में परिवार की खुशहाली के साथ पुरानी पेंशन बहाली का संकल्प भी सजाएंगी। उन्होंने कहा कि जिस हाथ से महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं, उसी हाथ से परिवार की आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक वृद्धावस्था के लिए भी आवाज उठाएंगी। उन्होंने प्रदेश की महिलाओं से अपने घरों, गांवों, कस्बों और कार्यस्थलों पर OPS के नाम की मेहंदी लगाकर अभियान को जनांदोलन का रूप देने की अपील की।
प्रदेश महिला उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीतू कार्की ने कहा कि कर्मचारी और शिक्षक लंबे समय से ज्ञापन, बैठकों, जनजागरण और विभिन्न लोकतांत्रिक कार्यक्रमों के माध्यम से पुरानी पेंशन बहाली की मांग उठा रहे हैं। अब मातृशक्ति भी इस संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि 2 नवंबर की रैली कर्मचारियों की एकजुटता का बड़ा संदेश देगी। इसके लिए महिला पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपने क्षेत्रों में व्यापक जनसंपर्क करने तथा अधिक से अधिक संख्या में रैली में शामिल होने की अपील की गई है।
कुमाऊं मंडल अध्यक्ष सुधा पांडे ने कहा कि मंडल की महिलाएं पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर एकजुट हैं और विभिन्न जनपदों में अभियान को लेकर संपर्क एवं समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने 2 नवंबर की रैली में कुमाऊं से बड़ी संख्या में महिला कर्मचारियों की भागीदारी का भरोसा दिलाया।
गढ़वाल मंडल अध्यक्ष रश्मि गौड़ ने कहा कि मंडल के सभी सात जनपदों में महिला पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क किया जा रहा है। OPS के नाम की मेहंदी अभियान के जरिए पुरानी पेंशन बहाली का संदेश गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने रैली को सफल बनाने के लिए गढ़वाल मंडल से भी बड़ी संख्या में महिलाओं के देहरादून पहुंचने की बात कही।
इस अवसर पर NOPRUF के प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल ने सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से 2 नवंबर को देहरादून में आयोजित होने वाली रैली में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अब समय केवल चर्चा और आश्वासन का नहीं, बल्कि एकजुट होकर अपनी मांग सरकार तक मजबूती से पहुंचाने का है। उन्होंने प्रदेश के सभी जनपदों के अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी एवं महिला कर्मचारियों से व्यापक जनसंपर्क कर रैली को सफल बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि OPS के नाम की मेहंदी अभियान मातृशक्ति की रचनात्मक अभिव्यक्ति है, जबकि 2 नवंबर की रैली कर्मचारियों की सामूहिक शक्ति और संघर्ष का प्रतीक बनेगी।
बैठक में श्रीमती रानीता प्रसाद विश्वकर्मा, नीतू कार्की, विक्रम सिंह रावत, मनोज अवस्थी, बी.पी. सिंह रावत, राजीव उनियाल, अभिषेक उनियाल, भारतीय जुयाल, चौधरी रुद्र त्याग एवं सीताराम पोखरियाल सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों से महिला पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं सदस्यों ने ऑनलाइन प्रतिभाग किया। विभिन्न जनपदों से जुड़ी महिलाओं ने अभियान को सफल बनाने और 2 नवंबर की रैली में अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।
महिला मोर्चा ने स्पष्ट किया कि करवा चौथ पर मेहंदी के जरिए पुरानी पेंशन बहाली का संदेश घर-घर तक पहुंचाया जाएगा। महिलाओं से अभियान के तहत मेहंदी की तस्वीरें और संदेश सोशल मीडिया पर साझा करने की अपील भी की गई।



