
देहरादून। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति द्वारा बुधवार को “सुसाइड प्रिवेंशन थ्रू युवा जोश (YUWA JOSH)” विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। एम्स ऋषिकेश के सोशल आउटरीच सेल ने तकनीकी सहयोग दिया। कार्यशाला पूर्वाह्न में साईं कॉलेज तथा अपराह्न में राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में संपन्न हुई।
मुख्य अतिथि मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने कहा कि आत्महत्या गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा है, जिसे समय पर पहचान, संवेदीकरण और परामर्श से रोका जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता, अपनी क्षमताओं के अनुसार आगे बढ़ें, अपनी बातें मित्रों व परिवार से साझा करें और सोशल मीडिया पर सिमटने के बजाय आउटडोर गेम्स व सामाजिक गतिविधियों में भाग लें।

मुख्य वक्ता डॉ. संतोष कुमार (एडिशनल प्रोफेसर, कम्युनिटी मेडिसन, एम्स ऋषिकेश) ने किशोरों में अवसाद व तनाव के कारणों पर प्रकाश डाला, जबकि नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. ब्रूज़िली अब्राहम ने सोशल मीडिया और पीयर प्रेशर के प्रभावों पर विस्तार से बताया। वक्ताओं ने युवाओं को मानसिक लचीलापन, भावनात्मक नियंत्रण और तनाव प्रबंधन के जरिए ‘कल्याण की कला’ सिखाने पर जोर दिया।
कार्यशाला में साईं कॉलेज सत्र में इंस्पेक्टर मुकेश त्यागी, सब इंस्पेक्टर प्रेरणा चौधरी, श्री एस.एस. गुसाईं व डॉ. आरती रौथान, जबकि दून मेडिकल कॉलेज सत्र में प्रधानाचार्य डॉ. गीता जैन, डॉ. अनुपमा आर्य, श्री शुभांश भट्ट, पूजन नेगी व श्री प्रवीण खत्री समेत स्वास्थ्य, प्रशासन, पुलिस और शिक्षा जगत के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



