
उत्तराखण्ड पुलिस के राज्य स्तरीय सम्मेलन में पीड़ितों के बचाव, पुनर्वास और तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई पर जोर, 11 पुलिसकर्मी सम्मानित
पंतनगर । मानव तस्करी जैसे गंभीर और संगठित अपराध की रोकथाम, पीड़ितों के सुरक्षित बचाव एवं पुनर्वास और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड पुलिस ने शुक्रवार को पंतनगर स्थित गांधी हॉल ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय मानव तस्करी सम्मेलन आयोजित किया। गृह मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित इस सम्मेलन में उत्तराखण्ड समेत छह राज्यों के पुलिस अधिकारियों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, केंद्रीय एजेंसियों, सरकारी विभागों, अभियोजन अधिकारियों, गैर-सरकारी संगठनों और बाल कल्याण समितियों के कुल 134 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सम्मेलन में उत्तराखण्ड के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों ने मानव तस्करी की रोकथाम से जुड़े अनुभवों और चुनौतियों पर चर्चा की। इस दौरान तस्करी के अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पहचान, सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान, साक्ष्य आधारित विवेचना और पीड़ितों के पुनर्वास के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया।
समन्वय से ही मानव तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण संभव
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखण्ड वी. मुरुगेशन ने कहा कि मानव तस्करी एक गंभीर और संगठित अपराध है। इससे निपटने के लिए केवल पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने, कानूनी प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन और पीड़ितों के पुनर्वास पर विशेष बल दिया।
सम्मेलन में पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण अनंत शंकर ताकवाले, पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं परिक्षेत्र निवेदिता कुकरेती, पुलिस उपमहानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था धीरेंद्र गुंज्याल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधमसिंह नगर अजय गणपति समेत विभिन्न जनपदों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) के नोडल अधिकारी एवं प्रभारी शामिल हुए।

विशेषज्ञों ने दिए प्रभावी कार्रवाई के सुझाव
सम्मेलन में सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक, एनडीआरएफ एवं टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) से जुड़े विशेषज्ञ पी.एम. नायर, एसडब्ल्यूआरसी बनबसा के संस्थापक एवं सचिव जनक बहादुर चन्द, मदद फाउंडेशन के संस्थापक एवं बाल संरक्षण विशेषज्ञ राजेश मणि, जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन के राष्ट्रीय संयोजक एवं शक्ति वाहिनी के संस्थापक रविकान्त, संयुक्त निदेशक (विधि) जी.सी. पंचोली और सहायक अभियोजन अधिकारी अपर्णा अवस्थी समेत अन्य विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
विशेषज्ञों ने आधुनिक विवेचना तकनीकों, साक्ष्य आधारित अन्वेषण, प्रभावी अभियोजन, पीड़ितों की समयबद्ध पहचान और बचाव के बाद उनके संरक्षण एवं पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत बनाने के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
पीड़ितों की सुरक्षा और पुनर्वास को प्राथमिकता
सम्मेलन में स्पष्ट किया गया कि मानव तस्करी के मामलों में केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए। अपराधियों के नेटवर्क, उनकी कार्यप्रणाली और बदलते तौर-तरीकों की पहचान कर उनके विरुद्ध समन्वित कार्रवाई करना भी जरूरी है। इसके लिए विभिन्न राज्यों की पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और संबंधित विभागों के बीच सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान तथा निरंतर सहयोग विकसित करने पर जोर दिया गया।
इसके साथ ही पीड़ितों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने, कानूनी एवं सामाजिक सहायता देने और उनकी गरिमा एवं सुरक्षा बनाए रखने को महत्वपूर्ण बताया गया। बच्चों और अन्य संवेदनशील वर्गों की समय पर पहचान, सुरक्षित बचाव, बाल कल्याण समितियों के समक्ष प्रस्तुत करने तथा पुनर्वास की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई।

हरिद्वार पुलिस ने साझा किए दो महत्वपूर्ण केस स्टडी
सम्मेलन में जनपद हरिद्वार पुलिस ने दो महत्वपूर्ण मामलों की जानकारी साझा की। पहले मामले में 13 वर्षीय अपहृत बालिका को बिहार से सकुशल बरामद कर पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। दूसरे मामले में अपहृत चार माह के शिशु को सुरक्षित बरामद किया गया।
इन दोनों मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, त्वरित जांच और अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। केस स्टडी के माध्यम से बताया गया कि संवेदनशील मामलों में शुरुआती घंटों के दौरान सक्रियता, वैज्ञानिक विवेचना और विभिन्न पुलिस इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल पीड़ितों की सुरक्षित बरामदगी में अहम भूमिका निभाते हैं।
उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 पुलिसकर्मी सम्मानित
सम्मेलन के समापन सत्र में मानव तस्करी की रोकथाम और संबंधित मामलों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मेलन को विभिन्न राज्यों की पुलिस, केंद्रीय बलों, सरकारी विभागों और गैर-सरकारी संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा मानव तस्करी के विरुद्ध प्रभावी और पीड़ित-केंद्रित कार्रवाई को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना गया।



