
देहरादून। इस बार दीपावली की रोशनी सिर्फ दीयों और लड़ियों तक सीमित नहीं है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की ग्रामीण महिलाएं त्योहार के इस सीजन में अपने हुनर और उद्यमशीलता के दम पर लाखों रुपये का कारोबार कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की ये महिलाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान को जमीन पर उतारते हुए आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं।
विकासखंड रायपुर के सोडा सरोली ग्रोथ सेंटर में दिव्य ज्योति क्लस्टर लेवल फेडरेशन की करीब 350 महिलाएं मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के तहत स्वदेशी हिलान्स एलईडी लड़ियां बना रही हैं। क्लस्टर को कुल 1.30 लाख लड़ियों का ऑर्डर मिला है, जिसमें से 1.05 लाख लड़ियों की आपूर्ति पहले ही पूरी हो चुकी है, जबकि शेष 25 हजार का निर्माण जारी है। क्लस्टर की अध्यक्ष ममता कोठियाल ने बताया कि ये लड़ियां बाजार में करीब ₹120 प्रति पैकेट की दर से बिक रही हैं। प्रत्येक महिला 100 पैकेट तैयार करने पर करीब ₹700 की आय कमा रही है। सोडा सरोली और थानों न्याय पंचायत के ग्रोथ सेंटरों से जुड़ी ये महिलाएं घरों पर ही निर्माण कार्य कर अपनी आजीविका को मजबूत कर रही हैं।
वहीं, विकासखंड विकासनगर के ग्राम सोरना डोभरी स्थित स्वाभिमान महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन की महिलाएं पहाड़ी मिलेट्स से बने आकर्षक गिफ्ट हैंपर तैयार कर रही हैं। दीपावली और भैया दूज के लिए बन रहे इन हैंपरों में हैंडमेड कुकीज, रागी हनी बिस्किट, फ्रूट एंड नट्स चॉकलेट, गुड़ मिल्क बिस्किट, मंडुआ केक और मंडुआ चॉकलेट जैसे उत्पाद शामिल हैं। इनकी मांग विकासनगर के साथ ही देहरादून, उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल तक तेजी से बढ़ रही है।

स्वाभिमान बेकरी यूनिट की सदस्य कल्पना बिष्ट ने बताया कि करीब दो वर्ष पूर्व ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (रीप) से जुड़कर उन्होंने बेकरी यूनिट की शुरुआत की थी। आजीविका मिशन के माध्यम से उन्हें विभिन्न सरकारी आयोजनों में स्टॉल लगाने के अवसर भी मिले। इस वर्ष दीपावली पर कई बड़े संस्थानों से गिफ्ट हैंपरों के ऑर्डर मिले हैं। अब तक 2,000 से अधिक हैंपर बेचकर यूनिट ₹18 लाख से अधिक की आय अर्जित कर चुकी है। इससे गांव की आठ अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिला है, जो अब लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि दीपावली के अवसर पर दोनों क्लस्टर की महिलाएं पूरे उत्साह और समर्पण के साथ आजीविका संवर्धन के कार्यों में जुटी हैं। स्थानीय उत्पादों की बढ़ती मांग से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।
दीपावली के इस पर्व पर ग्रामीण महिलाओं की यह पहल सिर्फ त्योहार की रौनक बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रेरक उदाहरण बन रही है।





