
देहरादून। राजधानी देहरादून की सड़कों पर शनिवार को प्रदेशभर से पहुंचे प्राथमिक शिक्षकों का सैलाब उमड़ा। पुरानी पेंशन योजना की बहाली और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता समाप्त करने सहित नौ सूत्रीय मांगों को लेकर उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षकों ने परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया।
परेड ग्राउंड में सुबह से जुटे हजारों शिक्षकों ने सभा के बाद रैली निकाली। न्यू कैंट रोड पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद शिक्षक सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों का समर्थन किया।
मुख्य मांगें
शिक्षक संगठन ने सरकार को नौ सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना की बहाली, वर्ष 2010 में आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट, गैर-शैक्षणिक ऑनलाइन कार्यों से मुक्ति, गोल्डन कार्ड योजना में सुधार तथा शिक्षा मित्रों की नियमितीकरण की मांग शामिल है।
शिक्षकों का तर्क है कि दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों की योग्यता को दोबारा TET जैसी परीक्षा से आंकना अनुचित है। संगठन के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के आदेश के बाद आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET पास करने का निर्देश दिया गया है, जबकि 55 वर्ष से अधिक आयु के शिक्षकों को छूट देकर सेवा जारी रखने का प्रावधान किया गया है, परंतु TET पास न करने पर पदोन्नति से वंचित रखा जा सकता है।

सरकार पर आक्रोश
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और बार-बार बातचीत के बाद भी सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि TET प्रावधान और अन्य मांगों का समाधान शीघ्र नहीं हुआ, तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा।
संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि शिक्षकों को शिक्षण के अतिरिक्त विभिन्न ऑनलाइन ऐप पर काम, ऑनलाइन पाठ्यक्रम पूरा करने और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों का दबाव झेलना पड़ रहा है, जिससे कक्षा शिक्षण प्रभावित हो रहा है।
प्रदेश भर से पहुंचे शिक्षक
हरिद्वार, उत्तरकाशी, पौड़ी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और नैनीताल सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में शिक्षक देहरादून पहुंचे। संगठन ने इससे पहले 24 अक्टूबर को प्रदेश के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सामूहिक अवकाश लेकर तालाबंदी करने तथा राजधानी में महारैली करने का निर्णय लिया था।
शिक्षक संगठन ने कहा कि यदि सरकार ने सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आगामी चुनावों में इसका राजनीतिक असर पड़ेगा। संगठन का दावा है कि देशभर में करीब 25 लाख शिक्षक दिल्ली में प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।



