
OPS के पक्ष में विभिन्न राज्यों के शासनादेश सौंपे, वित्तीय एवं सामाजिक सुरक्षा के आधार पर तुलनात्मक अध्ययन की मांग
देहरादून। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा (NOPRUF) उत्तराखंड के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव से मुलाकात कर प्रदेश के कर्मचारियों एवं शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग को मजबूती से उठाया। वार्ता में NPS, UPS और OPS के विभिन्न पहलुओं के साथ सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों की आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कर्मचारी अपना पूरा सेवाकाल राज्य और जनता की सेवा में समर्पित करते हैं। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक और सुनिश्चित पेंशन केवल आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि कर्मचारी और उसके परिवार की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा का विषय है। इस दौरान हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड सहित अन्य राज्यों में OPS बहाली से संबंधित शासनादेशों की प्रतियां मुख्य सचिव को सौंपी गईं।
प्रदेश प्रभारी विक्रम सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां अलग हैं तथा बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारी गांवों में रहते हैं। ऐसे में निश्चित पेंशन व्यवस्था परिवारों की सुरक्षा से सीधे जुड़ी है।

प्रदेश अध्यक्ष मनोज अवस्थी ने NPS में कर्मचारी एवं सरकार के अंशदान तथा निवेश व्यवस्था की समीक्षा की मांग की। प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल ने कहा कि NPS, UPS और OPS का मूल्यांकन केवल वित्तीय भार के आधार पर नहीं, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन, परिवार की सुरक्षा और महंगाई के प्रभाव को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
गढ़वाल मंडल अध्यक्ष शंकर भट्ट ने विभिन्न पेंशन व्यवस्थाओं का वास्तविक आंकड़ों के आधार पर तुलनात्मक अध्ययन कराने की मांग की। प्रदेश सचिव माखन लाल शाह ने कहा कि सरकार 2 नवंबर को प्रस्तावित प्रदेशव्यापी रैली से पहले OPS बहाली की दिशा में सकारात्मक पहल करे।
NOPRUF ने सरकार से वित्तीय, सामाजिक एवं प्रशासनिक तुलनात्मक अध्ययन कराकर समयबद्ध रोडमैप तैयार करने और कर्मचारी संगठनों के साथ नियमित संवाद की मांग की।
वार्ता में विक्रम सिंह रावत, मनोज अवस्थी, सीताराम पोखरियाल, माखन लाल शाह, शंकर भट्ट, शिव सिंह राणा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।



