
काठमांडू। नेपाल के गोरखा जिले में रविवार भोर के वक्त बूढ़ी गंडकी नदी ने अचानक विकराल रूप ले लिया। तेज बहाव में करीब चार दर्जन आवासीय भवन, कई छोटे-बड़े पुल और अन्य जरूरी ढांचे बह गए। घटना के बाद प्रशासन ने नदी किनारे बसे लोगों को हटाना शुरू कर दिया और आसपास के इलाकों के लिए अलर्ट जारी कर दिया।
प्रशासन ने जारी किया अलर्ट
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण की टीमों ने बाढ़ प्रभावित गांवों से निवासियों को बाहर निकाला और अन्य लोगों से सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को कहा। अभी तक किसी जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है। आपदा प्रबंधन एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कोई व्यक्ति लापता हुआ है या नहीं। स्थानीय अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वालों से ऊंचे स्थानों पर शरण लेने की अपील की है।
कई बस्तियों का संपर्क टूटा
काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के राम कुमार गुरुंग ने बताया कि सल्लेरी, पायूका और जगत में नदी के किनारे बने मकान बह गए। इन इलाकों में वार्ड को जोड़ने वाला पुल भी बहाव में बह गया। गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा के अनुसार, शुरुआती सूचनाओं में सिउरीबास के ऊपरी हिस्से में भूस्खलन की बात सामने आई है। नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। स्थानीय लोगों को संदेह है कि चुमनुब्री-6 में लोकपा और चुमलिंग के बीच बूढ़ी गंडकी की सहायक नदी स्यार का प्रवाह रुक गया, जिससे यह स्थिति बनी।
हेलीकॉप्टर तैनात, राहत-बचाव जारी
गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने कहा कि बाढ़ में चुमनुब्री-3 के न्याकचेत और फिलिम बाजार को जोड़ने वाला पुल बह गया है। नदी का जलस्तर अब भी बढ़ रहा है। राहत सामग्री पहुंचाने, बचाव अभियान चलाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी राहत-बचाव में जुटे हैं।
अगस्त की भोटेकोशी त्रासदी की याद ताजा
इस घटना ने नेपाल में अगस्त की भोटेकोशी त्रासदी की याद ताजा कर दी। रसुवा जिले में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ से भारी तबाही हुई थी। एनडीआरआरएमए के आंकड़ों के मुताबिक, रसुवा और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में उस आपदा में 1,455 लोगों की मौत हुई थी और 5,285 लापता हुए थे। इसे नेपाल के हालिया इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में गिना जाता है।




