
समान वेतन, कार्यस्थल पर सम्मान और साइबर उत्पीड़न से सुरक्षा की उठी मांग, उत्तराखंड की ज्योति भट्ट ध्यानी और रक्षा शर्मा ने किया प्रतिनिधित्व
देहरादून। हैदराबाद में आयोजित महिला पत्रकारों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से जुटीं महिला पत्रकारों ने कार्यस्थल पर भेदभाव, यौन उत्पीड़न, समान वेतन, पेशेवर सुरक्षा और डिजिटल माध्यमों पर बढ़ते अपराधों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सम्मेलन में महिला पत्रकारों के अधिकार, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों, पुलिस और मीडिया संस्थानों से ठोस कदम उठाने की मांग करते हुए कई प्रस्ताव पारित किए गए। सम्मेलन में उत्तराखंड की महिला पत्रकार ज्योति भट्ट ध्यानी और रक्षा शर्मा ने प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया।
हैदराबाद के होटल टूरिज्म प्लाजा में आयोजित इस सम्मेलन के आयोजन में इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन (IJU) और तेलंगाना यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सम्मेलन में तेलंगाना की पंचायत राज एवं महिला एवं बाल कल्याण मंत्री दानसारी अनसूया ने कहा कि प्रत्येक महिला को सवाल पूछने, असहमति जताने और सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। उन्होंने महिला पत्रकारों की सुरक्षा और पेशेवर अधिकारों को सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी महिला को अपना काम करने के लिए डराया-धमकाया नहीं जाना चाहिए।
कर्नाटक मीडिया अकादमी की चेयरपर्सन आयशा खानम ने तेलंगाना राज्य आंदोलन की रिपोर्टिंग के अपने अनुभव साझा किए और महिला पत्रकारों से अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। वहीं, पुलिस कमिश्नर सुमति ने पत्रकारिता में लोकतंत्र, नेतृत्व और व्यावसायिकता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए निर्भीक रिपोर्टिंग करने की अपील की।

सम्मेलन में सभी मीडिया संस्थानों में यौन उत्पीड़न की रोकथाम से जुड़े POSH कानून को अनिवार्य रूप से लागू करने, आंतरिक शिकायत समितियों को प्रभावी बनाने तथा राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर महिला पत्रकारों की सुरक्षा के लिए स्वतंत्र प्रकोष्ठ गठित करने की मांग की गई। दिल्ली में सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के कथित उत्पीड़न और सितंबर में एक पुलिस थाने में महिला ग्राउंड रिपोर्टरों के साथ कथित मारपीट की स्वतंत्र जांच कराने तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग भी उठाई गई।
महिला पत्रकारों ने राजनीतिक नेताओं, कॉरपोरेट संस्थाओं और आपराधिक समूहों से मिलने वाली धमकियों के खिलाफ व्यापक कानूनी सुरक्षा तथा प्रतिशोधात्मक मुकदमों का सामना कर रहे पत्रकारों को सरकारी खर्च पर कानूनी सहायता देने की मांग की। साइबर पीछा करने, निजी जानकारी सार्वजनिक करने, तस्वीरों से छेड़छाड़ और डीपफेक जैसी घटनाओं पर चिंता जताते हुए विशेष साइबर अपराध इकाइयां बनाने और मीडिया संस्थानों में डिजिटल सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने का प्रस्ताव रखा गया।
सम्मेलन में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, कश्मीर, लद्दाख, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सहित विभिन्न राज्यों की महिला पत्रकारों ने भाग लिया।

सम्मेलन से लौटने के बाद उत्तराखंड की महिला पत्रकारों ने कहा कि महिला पत्रकार आज केवल खबरें नहीं लिख रहीं, बल्कि अपनी निर्भीक पत्रकारिता से समाज की सोच बदल रही हैं। यह सम्मेलन नई दृष्टि, ऊर्जा और महिला पत्रकारों के अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने का संकल्प लेकर संपन्न हुआ।



