
वाइल्ड फ्लावर हॉल की ई-नीलामी का दिया उदाहरण, सरकारी संपत्तियों के उपयोग पर कांग्रेस से मांगा जवाब; आंदोलनों से त्योहारों के दौरान व्यापार प्रभावित न करने की अपील
देहरादून । उत्तराखंड में सरकारी भूमि और परिसंपत्तियों के उपयोग को लेकर कांग्रेस के विरोध पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा शिमला स्थित वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल के संचालन एवं प्रबंधन के अधिकार ई-नीलामी के माध्यम से दिए जाने का उदाहरण देते हुए पूछा कि जब कांग्रेस की सरकार हिमाचल में सार्वजनिक संपत्तियों के व्यावसायिक उपयोग और राजस्व बढ़ाने की नीति अपना रही है, तो उत्तराखंड में समान उद्देश्य वाली योजनाओं का विरोध क्यों किया जा रहा है?
भट्ट ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल के संचालन एवं प्रबंधन के अधिकार प्रतिस्पर्धात्मक ई-नीलामी के माध्यम से दिए हैं। इस व्यवस्था के तहत सरकार को होटल के वार्षिक सकल राजस्व का 47.1 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। आगामी 35 वर्षों में करीब 2,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार ने इसे सार्वजनिक संपत्ति के बेहतर आर्थिक उपयोग और राज्य की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। ऐसे में कांग्रेस को उत्तराखंड में सरकारी परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग की संभावनाओं पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
प्रस्ताव और अंतिम परियोजना में अंतर समझे कांग्रेस
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि उत्तराखंड में पटवाडांगर, एचएमटी रानीबाग, रामगढ़, डाकपत्थर और अलकनंदा होटल से संबंधित मामलों में भूमि के बेहतर उपयोग, पुनर्विकास और पर्यटन निवेश की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। उपलब्ध विभागीय विवरण के अनुसार इन स्थानों पर फिलहाल कोई परियोजना क्रियान्वित नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी प्रस्ताव, प्रारंभिक अध्ययन और अंतिम स्वीकृत परियोजना के बीच अंतर होता है। इसलिए सरकारी भूमि के उपयोग संबंधी प्रस्तावों को सीधे भूमि बिक्री या अंतिम परियोजना बताकर भ्रम फैलाना उचित नहीं है।
आंदोलनों से व्यापारियों को नुकसान पर जताई चिंता
भट्ट ने त्योहारों के दौरान आंदोलनों और प्रदर्शनों से व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने दिल्ली के व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के दावे का हवाला देते हुए कहा कि हाल के प्रदर्शनों के कारण व्यापार प्रभावित हुआ और हजारों करोड़ रुपये के अनुमानित नुकसान की बात सामने आई है। संगठन ने त्योहारों के दौरान बाजारों में निर्बाध व्यापार सुनिश्चित करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके साथ छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, श्रमिकों और आम नागरिकों की आजीविका का ध्यान रखना भी जरूरी है। उत्तराखंड में राजनीतिक कार्यक्रमों और आंदोलनों के दौरान बाजारों तथा आमजन की आवाजाही प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
भट्ट ने कहा कि सरकारी परिसंपत्तियों के संबंध में किसी भी निर्णय का आधार पारदर्शिता, जनहित, पर्यावरण संरक्षण और राज्य का आर्थिक हित होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस से हिमाचल और उत्तराखंड में सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर अपने दोहरे दृष्टिकोण पर स्पष्टीकरण देने और भूमि संबंधी मुद्दों पर ठोस तथ्यों के आधार पर चर्चा करने का आग्रह किया।




