
देहरादून। हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला में चल रहे भव्य विरासत महोत्सव-2026 का गुरुवार का दिन सेकेंड लास्ट-डे के रूप में संगीत की मधुर तरंगों में डूबा रहा। इस शाम जहाँ हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक अनोल चटर्जी की प्रस्तुति ने महफिल को गुलो-गुलज़ार कर दिया, वहीं सैक्सोफोन वादक जॉर्ज ब्रूक्स और वायलिन वादक कला रामनाथ की युग्म प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया।
अनोल चटर्जी ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत राग यमन से की, जिसके बाद ठुमरी, दादरा और भजन प्रस्तुत किए। तबले पर शुभ महाराज, हारमोनियम पर धर्मनाथ मिश्रा और तानपुरे पर सिद्धांत प्रुथी ने संगत की। कलाकारों के बीच सुर-ताल का सुंदर सामंजस्य देखते ही बनता था।
पद्मभूषण अजय चक्रबर्ती के प्रमुख शिष्य अनोल चटर्जी ने आईटीसी एसआरए संगीत सम्मेलन, केसरबाई केरकर संगीत समारोह, स्वर मंगेश महोत्सव, संगीत नाटक अकादमी कॉन्सर्ट और आईसीसीआर न्यू होराइजन कॉन्सर्ट जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुति दी है। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, नीदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश में उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत की झोली बिखेरी है। वर्तमान में वे कोलकाता के श्रुतिनांदन स्कूल के कार्यवाहक प्रधानाचार्य हैं। उनके पहले एल्बम ‘न्यू सिग्नेचर’ का उद्घाटन उस्ताद जाकिर हुसैन के हाथों हुआ था, जबकि रवि शंकर, अमजद अली खान और अरिजीत सिंह ने भी उनकी कला की सराहना की है। आदित्य बिड़ला कला किरण पुरस्कार, श्रुतिनंदन पुरस्कार, ऑल इंडिया रेडियो की ‘ए’ ग्रेड और डोवर लेन संगीत प्रतियोगिता जैसे सम्मान उन्हें मिल चुके हैं।

सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत राजस्थान के प्रसिद्ध लोक नृत्य कालबेलिया से हुई। बाड़मेर के लांगा ग्रुप की इस मनमोहक प्रस्तुति में गीता, मनीषा और निशा ने अपनी भावपूर्ण अभिव्यक्तियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हारमोनियम पर जाकिर खान, सारंगी पर दूड़े खान, ढोलक पर शौकत खान, खड़ताल पर इरफान हुसैन, डफली पर रामनाथ और मंजीरे पर सागर ने संगत की, जबकि सलीम खान, फारूक, सोनू खान और जाकिर ने अपनी मधुर आवाज़ों से प्रस्तुति को और प्रभावशाली बनाया।
इसके बाद ‘एन इवनिंग ऑफ कॉन्फ्लुएंस’ के तहत जॉर्ज ब्रूक्स (सैक्सोफोन) और कला रामनाथ (वायलिन) की विशेष प्रस्तुति ने महफिल में नए रंग भर दिए। भारतीय शास्त्रीय और समकालीन संगीत के इस संगम में प्रस्तुति की शुरुआत ब्रूक्स की रचना पर आधारित काफ़ी ठाट से हुई और समापन राग भैरवी में हुआ। तबले पर शुभ महाराज ने शानदार संगत की।
जैज़ और भारतीय शास्त्रीय संगीत को जोड़ने के लिए विश्वभर में ख्यात जॉर्ज ब्रूक्स ने 1980 में भारत आकर किराना घराने के प्राण नाथ से गुरु-शिष्य परंपरा में संगीत सीखा और ‘समिट’, ‘किरवानी चौकड़ी’ और ‘एलिमेंट्स’ जैसे भारतीय फ्यूजन समूहों की नींव रखी। वहीं मेवाती घराने से जुड़ी कला रामनाथ को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, राष्ट्रीय कुमार गंधर्व सम्मान और पंडित जसराज गौरव पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्होंने लंदन सिम्फनी और लंदन फिलहारमोनिक जैसे ऑर्केस्ट्रा के साथ काम किया है, जबकि ‘ब्लड डायमंड’ जैसी हॉलीवुड फिल्मों के बैकग्राउंड स्कोर में भी उनका योगदान रहा है।


इस बीच महोत्सव के 15 दिवसीय सफर के 14 दिन पूरे हो चुके हैं और अब मात्र एक दिन शेष है। इन दिनों में लाखों श्रोताओं ने शास्त्रीय संगीत का आनंद लिया। फूड कोर्ट में गुजरात, दिल्ली, जयपुर, हिमाचल, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के व्यंजनों के स्टालों पर रोज़ खासी भीड़ उमड़ी। फर्नीचर और साज-सज्जा की खरीदारी में भी लोगों का उत्साह निरंतर बना रहा। सेकेंड लास्ट-डे पर अब सभी की निगाहें महोत्सव के समापन की भव्य प्रस्तुति पर टिकी हैं।



