
पुरानी टिहरी की 1952 से चली आ रही रामलीला परंपरा को देहरादून में दिया जा रहा नया स्वरूप, 11 दिन तक चला महोत्सव
देहरादून। रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान में आयोजित ‘भव्य रामलीला महोत्सव-2026’ का बुधवार को भगवान श्रीराम के राजतिलक, पुरस्कार वितरण और कलाकारों के सम्मान के साथ समापन हो गया। श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952 की ओर से आयोजित 11 दिवसीय महोत्सव में भगवान श्रीराम की लीलाओं, आधुनिक लेजर एवं साउंड तकनीक और उत्तराखंड की लोकसंस्कृति की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
समापन समारोह में भगवान श्रीराम के राजतिलक का भव्य आयोजन किया गया। लेजर शो और आकर्षक रोशनी के बीच हुए राज्याभिषेक ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान धर्म, सत्य, मर्यादा और न्याय की स्थापना का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण और पूर्व विधायक राजकुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण ने कहा कि पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला को देहरादून में भव्य स्वरूप में आगे बढ़ाना उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। वर्ष 1952 से चली आ रही इस परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए जरूरी है।

पूर्व विधायक राजकुमार ने कहा कि राजपुर रोड विधानसभा क्षेत्र में आयोजित यह ऐतिहासिक रामलीला पूरे देहरादून के लिए गर्व का विषय है। इतने बड़े स्तर पर सांस्कृतिक आयोजन कर उत्तराखंड की परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाना सराहनीय है।
समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि पुरानी टिहरी में वर्ष 1952 से आयोजित होने वाली रामलीला को टिहरी बांध निर्माण के बाद पुरानी टिहरी के जलमग्न होने पर देहरादून में पुनर्जीवित करना समिति का संकल्प रहा है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और सनातन परंपराओं के संरक्षण का माध्यम बन रहा है।
वरिष्ठ कलाकारों और सहयोगियों का सम्मान
समापन समारोह में रामलीला की परंपरा को वर्ष 1952 से वर्तमान तक जीवित रखने वाले वरिष्ठ कलाकारों, उनके परिवारों, कलाकारों, गायकों, संगीतकारों, कीर्तन मंडलियों, तकनीकी टीम और स्वयंसेवकों को सम्मानित किया गया। आयोजन को सफल बनाने में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से योगदान देने वाले सहयोगियों को भी पुरस्कार प्रदान किए गए।
इस वर्ष महोत्सव में आधुनिक एलईडी एवं लेजर तकनीक, भव्य साउंड शो और उत्तराखंड की लोकसंस्कृति पर आधारित प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। दशहरे पर 80 फुट ऊंचे एलईडी एवं लेजर तकनीक से सुसज्जित रावण तथा 65 फुट ऊंचे कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया था।

समिति के अनुसार, वर्ष 2025 में इस ऐतिहासिक रामलीला को डिजिटल माध्यमों पर 82 लाख से अधिक लोगों ने देखा था। वर्ष 2026 में इसे एक करोड़ दर्शकों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम का संचालन भारती आनंद ने किया। इस अवसर पर समिति के सचिव अमित पंत, संरक्षक एवं निर्देशक अनुराग पंत, नरेश कुमार, दुर्गा भट्ट, गिरीश पैन्यूली, अजय पैन्यूली, नीता बहुगुणा, शशि पैन्यूली, कुशन नेनवाल सहित समिति के सदस्य, कलाकार और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अंत में समिति ने अतिथियों, श्रद्धालुओं, दर्शकों, कलाकारों, सहयोगियों और मीडिया प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।



