
अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी से जुड़े सवालों की निष्पक्ष जांच की मांग, कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता बोले—अंकिता को न्याय दिलाना सरकार की जिम्मेदारी
देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट संदीप चमोली ने दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर सवाल उठाते हुए इसे उत्तराखंड की जनभावनाओं के विपरीत बताया है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी से जुड़े सवालों को लेकर प्रदेश की जनता लंबे समय से जवाब मांग रही है, लेकिन आज भी अंकिता के माता-पिता न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
संदीप चमोली ने कहा कि ऐसे संवेदनशील समय में दुष्यंत गौतम को संवैधानिक पद पर नियुक्त किया जाना प्रदेशवासियों के मन में कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता ने संविधान के अनुच्छेद 361 का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रपति और राज्यपाल को उनके पद की गरिमा तथा स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कुछ संवैधानिक संरक्षण दिए गए हैं। हालांकि, उनके अनुसार, इन प्रावधानों को किसी भी मामले में उठ रहे सवालों से स्थायी रूप से मुक्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अंकिता की मां के आंसू, पिता का दर्द और पूरे उत्तराखंड की न्याय की मांग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कथित वीआईपी से संबंधित सवालों सहित मामले के सभी प्रासंगिक पहलुओं की जांच कानून के अनुरूप और निष्पक्ष तरीके से हो।
संदीप चमोली ने भाजपा सरकार से जनभावनाओं का सम्मान करने और अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों की गरिमा महत्वपूर्ण है, लेकिन जनता के मन में उठ रहे सवालों का समाधान भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग जारी रखेगी और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करेगी।



