
चमोली / बद्रीनाथ। बद्रीनाथ धाम के परिसर में गूंजे हुए डीजे और तेज संगीत की आवाजें अब एक प्रशासनिक विवाद का रूप लेती जा रही हैं। ‘दिव्य देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026’ के आयोजन को लेकर चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने गढ़वाल स्काउट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल शंतनु से स्पष्टीकरण तलब किया है और सीधे सवाल पूछा है कि आखिर किसकी अनुमति से धाम की पवित्र भूमि में यह आयोजन करवाया गया। डीएम ने भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न होने देने के निर्देश भी दिए हैं।
जानकारी के अनुसार यह महोत्सव 19 और 20 सितंबर को बद्रीनाथ के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में भारतीय सेना और चमोली जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था। ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ थीम पर आधारित इस उत्सव का उद्देश्य गढ़वाल की लोक संस्कृति, कला, व्यंजन और हस्तशिल्प को एक मंच पर प्रदर्शित करना था। कार्यक्रम में विभिन्न स्टॉल लगाए गए, जिनमें महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद, स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों को प्रदर्शित किया गया। सेना की ओर से भी एक प्रदर्शनी लगाई गई।

मंच पर क्षेत्र के जाने-माने कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। पहले दिन कुसुम भट्ट, गिरिश सुंदरियाल, संगीता धौंडियाल, आलोक मलासी और लोक गायक किशन महिपाल ने संध्या को रंगीन बनाया। आलोक मलासी ने हारमोनियम, त्रिशूल बडोनी ने तबला और सोनू ने गिटार पर संगत दी, जबकि कार्यक्रम का संचालन गढ़वाली साहित्यकार एवं शिक्षक धर्मेंद्र नेगी ने किया। विवाद की आड़ में आईं गायिका प्रियंका महर की प्रस्तुति भी इसी महोत्सव का हिस्सा थी — किशन महिपाल और प्रियंका महर के प्रदर्शनों के दौरान तेज संगीत और डीजे के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ही यह पूरा प्रकरण गरमाया था।
इसी बीच, 20 सितंबर को महोत्सव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी पहुंचे। मुख्यमंत्री ने सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं और उपविजेताओं को सम्मानित किया, महिला स्वयं सहायता समूहों, हस्तशिल्प एवं स्थानीय उत्पादों के स्टॉल देखे और सेना की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

हालांकि, उत्सव की यह धूम अब प्रशासनिक जांच की चपेट में आ गई है। जिलाधिकारी गौरव कुमार का मानना है कि पवित्र धाम के परिसर में इस तरह के आयोजन के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया और अनुमति का होना अनिवार्य है। उन्होंने गढ़वाल स्काउट के कमांडिंग ऑफिसर को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की जानकारी मांगी है और साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसा कोई भी आयोजन बिना अग्रिम सूचना और अनुमति के न होने दिया जाए। अब सेना प्रशासन की ओर से इस पत्र का जवाब आना ही तय करेगा कि इस विवाद को लेकर आगे क्या रुख अपनाया जाता है।



