
नंदकिशोर नौटियाल के नेतृत्व में 31 सूत्री मांगों को लेकर सत्याग्रह, मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
बीरोखाल। क्षेत्र की बदहाल सड़कों को लेकर राज्य आंदोलनकारी नंदकिशोर नौटियाल के नेतृत्व में आयोजित सत्याग्रह में उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री धीरेंद्र प्रताप ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। धुमाकोट से बीरोखाल पहुंचे धीरेंद्र प्रताप ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा ने बीरोखाल को गड्ढे और बदहाल सड़कें दी हैं, जिसके लिए सरकार को माफ नहीं किया जा सकता।
धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि यह स्थिति सिर्फ बीरोखाल की नहीं, बल्कि पूरे राज्य की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क परिवहन मंत्री सड़कों की हालत सुधारने में विफल रहे हैं। नौटियाल के नेतृत्व में उठाई गई 31 सूत्री मांगों को उन्होंने उत्तराखंड के लगभग पूरे राज्य की कहानी बताया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर तंज कसते हुए उन्होंने उन्हें “गगन विहारी” करार दिया। उनका कहना था कि जब मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से नीचे ही नहीं उतरते, तो उन्हें सड़कों की असली हालत का पता कैसे चलेगा। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव की जरूरत बताई। इन दोनों व्यवस्थाओं की विफलता को उन्होंने पलायन का मुख्य कारण बताया।
चुनाव का जिक्र करते हुए धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि राज्य में कुछ ही महीने बाद चुनाव हैं और भाजपा सरकार चंद महीनों की ही रह गई है। उन्होंने दिल्ली की ओर इशारा करते हुए आरोप लगाया कि वहां तानाशाही चल रही है और लोगों के संवैधानिक अधिकार खत्म किए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कमर कसने और सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए आगे आने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने सरकार को निकम्मी, भ्रष्ट और अकर्मण्य बताया।
सत्याग्रह के संयोजक नंदकिशोर नौटियाल ने भी सरकार और सड़क मंत्री को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि वे क्षेत्र की जनता की आकांक्षाएं पूरी करने में नाकाम रहे। सभा को रघुवीर सिंह बिष्ट, बलवंत सिंह, पोखड़ा के पूर्व प्रमुख सुरेंद्र रावत और रविंद्र सिंह रावत सहित कई लोगों ने संबोधित किया। वक्ताओं ने सरकार को जनविरोधी बताया।
आयोजकों के अनुसार सत्याग्रह तब तक जारी रहेगा, जब तक नौटियाल द्वारा उठाई गई 31 सूत्री मांगें पूरी नहीं हो जातीं। इन मांगों में विधानसभा क्षेत्र की तमाम सड़कों का उल्लेख है और उनकी खस्ता हालत का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। सभा में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, अस्पतालों की बदहाली, महिलाओं के अपमान और बाघ, भालू व बंदरों से लोगों के जीवन पर बढ़ते खतरे जैसे मुद्दे भी जोर-शोर से उठाए गए।



