
देहरादून। NEET-UG काउंसलिंग में फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए दाखिला लेने के मामले में धामी सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने अब तक 19 संदिग्ध दाखिले निरस्त कर दिए हैं और 778 से अधिक प्रमाण पत्रों की गहन जांच जारी है। वहीं इस पूरे फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड समेत 3 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
यह जानकारी भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं वरिष्ठ विधायक विनोद चमोली ने दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन स्तर पर गठित विशेष जांच दल (SIT) और जिला प्रशासन की टीमों ने तत्काल कार्रवाई शुरू की थी।
चमोली ने बताया कि राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी, श्रीनगर और हरिद्वार सहित विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में भौतिक सत्यापन के बाद फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित, SC, OBC, EWS और स्थायी निवास प्रमाण पत्रों के आधार पर लिए गए 19 दाखिले निरस्त किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि SIT ने इस गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए मेरठ से एजुकेशनल कंसल्टेंसी चलाने वाले मास्टरमाइंड रूपेश पंडित, भोपाल के कंसल्टेंट धीरज कुमार और फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए अपनी बेटी का एडमिशन कराने वाले अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया है। साथ ही फर्जीवाड़ा करने वाले राजस्व कर्मियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने पर निलंबन और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश प्रवक्ता ने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि धामी सरकार ‘जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन’ के मंत्र पर काम कर रही है। युवाओं के भविष्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। कांग्रेस शासनकाल में ऐसी फाइलें दबा दी जाती थीं, जबकि धामी सरकार में खबर आते ही सीधे कार्रवाई होती है।
उन्होंने कहा कि जब सरकार ने पहले ही पारदर्शी और निर्णायक कार्रवाई कर दी है, तो कांग्रेस को हताशा में सियासत नहीं करनी चाहिए और सरकार की निष्पक्ष कार्रवाई का सम्मान करना चाहिए।



