
जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट सहित 40 सरकारी संपत्तियों को मूल विभागों को लौटाने की मांग, गणेश जोशी की आय से अधिक संपत्ति, सहकारिता भर्ती और एमबीबीएस दाखिलों की जांच का भी उठाया मुद्दा
देहरादून । उत्तराखंड में सरकारी जमीनों और बेशकीमती संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपे जाने के मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस ने धामी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को राज्यपाल से मुलाकात कर उन्हें विस्तृत ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर प्रदेश की महत्वपूर्ण सरकारी जमीनों को औने-पौने दामों पर लीज पर देने और संपत्तियों के हस्तांतरण में नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। प्रतिनिधिमंडल ने ऐसे सभी निर्णयों को निरस्त करने और यूआईआईडीबी तथा सिडकुल को हस्तांतरित की गई सरकारी संपत्तियों को उनके मूल विभागों को वापस लौटाने की मांग की।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 154 और 166 के तहत राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित है तथा राज्य सरकार की समस्त कार्यवाही उनके नाम से होती है। ऐसे में सरकारी जमीनों और ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़े निर्णयों की संवैधानिक और प्रशासनिक समीक्षा आवश्यक है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि 20 दिसंबर 2022 के कैबिनेट निर्णय के माध्यम से विभिन्न विभागों की सरकारी जमीनों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री के स्तर पर केंद्रित कर दिया गया। कांग्रेस ने इसे मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना और कार्य नियमावली के प्रावधानों के विपरीत बताया।
प्रतिनिधिमंडल ने मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की 142 एकड़ भूमि को 15 वर्षों के लिए लगभग एक करोड़ रुपये वार्षिक किराये पर निजी कंपनी को दिए जाने पर गंभीर सवाल उठाए। कांग्रेस का आरोप है कि हजारों करोड़ रुपये बाजार मूल्य वाली इस ऐतिहासिक संपत्ति को लीज पर देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा के नियमों का पालन नहीं किया गया। पार्टी ने इस पूरे मामले की उच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने तथा लीज निरस्त करने की मांग की।
ज्ञापन में पटवाडांगर, डाकपत्थर, आईडीपीएल ऋषिकेश, रामगढ़, एचएमटी रानीबाग, माजरी ग्रांट सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की सरकारी जमीनों के हस्तांतरण पर भी सवाल उठाए गए। कांग्रेस ने दावा किया कि करीब 40 सरकारी संपत्तियां प्रदेश के 13 में से 12 जिलों में स्थित हैं और इनका बाजार मूल्य लगभग एक लाख करोड़ रुपये है। पार्टी ने बिना स्पष्ट राजस्व अभिलेखों, पैमाइश और स्वामित्व की पुष्टि के जमीनों के हस्तांतरण को गंभीर अनियमितता बताया।
कांग्रेस ने पटवाडांगर, हरिद्वार के अलकनंदा होटल और ऋषिकेश निरीक्षण भवन से संबंधित यूआईआईडीबी के तीनों टेंडर तत्काल निरस्त करने तथा लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवनों को पीपीपी मोड में देने की प्रक्रिया रोकने की मांग भी की।
इसके अतिरिक्त प्रतिनिधिमंडल ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में न्यायालय के निर्देशों का पालन करने और आवश्यक वैधानिक अनुमति देने की मांग उठाई। कांग्रेस ने कोरोना काल में सहकारिता विभाग की भर्तियों में कथित अनियमितताओं और अभ्यर्थियों से 20-20 लाख रुपये लेकर नौकरी देने के आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। साथ ही एमबीबीएस में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए दाखिलों की समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि ज्ञापन प्राप्त होने के 10 दिनों के भीतर विवादित निर्णयों को निरस्त करने और सरकारी संपत्तियों को उनके मूल विभागों को लौटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर प्रदेश की जनता की संपत्तियों की रक्षा के लिए पार्टी उच्च न्यायालय की शरण लेगी।
राज्यपाल से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत, विधायक मदन बिष्ट, फुरकान अहमद, पूर्व विधायक मनोज रावत, प्रदेश उपाध्यक्ष सीपी सिंह और राजीव महर्षि, प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र शाह, महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला, सुरेन्द्र सिंह रांगड़ और राजेश चमोली सहित अन्य नेता शामिल रहे।




