
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्य सेवक सदन में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत के मजबूत लोकतंत्र का आधार संवैधानिक संस्थाएं हैं और चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है।
मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग के 26 सितंबर के आधिकारिक नोट का हवाला देते हुए कहा कि 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू व डॉ. विवेक जोशी की पूर्ण आयोग की बैठक हुई थी और बैठक के बाद जारी नोट को पूरे आयोग की स्वीकृति प्राप्त है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 24 जून 2025 को जारी SIR का मूल आदेश, उसके बाद 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और फिर 19 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की SIR समय-सारिणी पूरे आयोग की सर्वसम्मति से स्वीकृत की गई थी, इसलिए किसी आंतरिक टिप्पणी को अंतिम निर्णय में मतभेद के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समाचार पत्र में दो चुनाव आयुक्तों द्वारा 14 आपत्तियां दर्ज करने की रिपोर्ट आई थी, लेकिन आयोग का आधिकारिक पक्ष है कि SIR से जुड़े अंतिम आदेश सर्वसम्मति से लिए गए और सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 के निर्णय में SIR करने की चुनाव आयोग की वैधानिक शक्ति को स्वीकार करते हुए बिहार में अपनाई गई SIR प्रक्रिया को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुरूप माना है। उन्होंने बताया कि आयोग ने कैबिनेट सचिव को लिखा पत्र प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी की कार्यप्रणाली से जुड़ा प्रशासनिक विषय था, Form-6 से जुड़े declaration को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का आधार प्राप्त है और non-SIR अवधि में Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित सामान्य फॉर्म ही लागू रहेंगे। आयोग ने यह भी व्यवस्था की है कि unmapped या logical discrepancy वाले मतदाताओं के दस्तावेज BLO घर जाकर प्राप्त करेंगे और सामान्यतः उन्हें कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा, जबकि रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, श्रमिकों, गरीब और बेघर नागरिकों के लिए हेल्प डेस्क और विशेष शिविर लगाए जाएंगे तथा छूटे हुए और पहली बार मतदाता बनने वालों के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
ECINet को लेकर उठे प्रश्नों पर सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अध्यक्षता में IIT/IIIT के स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल कर समिति द्वारा स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा कराई जाएगी और भविष्य में कमीशन की बैठकों का एजेंडा पहले सर्कुलेट करने और मिनट्स जारी करने का निर्णय भी लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में प्रश्न पूछे जाने चाहिए, लेकिन इंटरनल नोट को अंतिम फैसला और ऑब्जेक्शन को इंस्टीट्यूशनल ब्रेकडाउन के रूप में प्रस्तुत करना ठीक नहीं है, तथ्य हेडलाइन से नहीं पूरी फाइल और अंतिम संस्थागत निर्णय से तय होते हैं।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक कमजोरी छिपाने के लिए संस्थाओं को ढाल बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि हार का ठीकरा कभी EVM तो कभी संस्थाओं पर फोड़ना उचित नहीं है और आज की जागरूक पीढ़ी तथ्यों के आधार पर निर्णय लेती है। राहुल गांधी के नकल माफिया वाले आरोप पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने नकल माफिया के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर 100 से अधिक आरोपियों को जेल भेजा है, भर्ती परीक्षाओं की शुचिता के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है और पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं।
हल्द्वानी प्रकरण पर उन्होंने कहा कि किसी घटना को जातीय दृष्टिकोण से देखने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी है और उत्तराखंड को जाति और वर्ग में बांटने की राजनीति नहीं होनी चाहिए क्योंकि देवभूमि की पहचान सामाजिक समरसता और भाईचारे की रही है। जमीन से जुड़े आरोपों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि विपक्ष के पास सरकार या किसी सरकारी संस्था द्वारा नियमों के विरुद्ध जमीन बेचे जाने का कोई प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक किया जाए, केवल आरोप दोहराने से वह तथ्य नहीं बन जाता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत माता, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और देश के प्रथम CDS जनरल बिपिन रावत से जुड़े हालिया बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध में भाषा और मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए और देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले व्यक्तियों व दिवंगत लोगों को लेकर सम्मान बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान और सह प्रभारी राजेंद्र नेगी उपस्थित रहे।



