
भाजपा ने उत्तराखंड से राज्यसभा चुनाव के लिए वरिष्ठ नेता दिनेश आर्य को उम्मीदवार घोषित किया है। 16 अक्टूबर को चुनाव प्रस्तावित है। जानिए दिनेश आर्य का राजनीतिक सफर।
देहरादून। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड से राज्यसभा की एक सीट के लिए अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने वरिष्ठ भाजपा नेता दिनेश आर्य को प्रत्याशी बनाया है। आर्य के नाम की घोषणा के साथ ही पिछले कई दिनों से चल रही दावेदारों की चर्चाओं पर विराम लग गया।
दिनेश आर्य नैनीताल से ताल्लुक रखते हैं और लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं। वह पूर्व में नैनीताल जिला भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वर्तमान में वह उत्तराखंड सरकार में राज्यमंत्री स्तर का दर्जा प्राप्त दायित्व भी संभाल रहे हैं।
संगठन में लंबा अनुभव, अब राज्यसभा की राह
दिनेश आर्य का राजनीतिक सफर छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से शुरू हुआ। इसके बाद वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी जुड़े रहे। संगठनात्मक राजनीति में सक्रिय रहते हुए उन्होंने भाजपा नैनीताल जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली। इसके अलावा वे भाजपा युवा मोर्चा और अनुसूचित मोर्चा में प्रदेश स्तर के विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं।
दिनेश आर्य मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े रहने के दौरान उन्होंने जनसंपर्क और संगठन से जुड़े कार्यों में भूमिका निभाई।करीब चार दशक से संगठन से जुड़े आर्य की सक्रियता को देखते हुए पार्टी ने अब उन्हें राज्यसभा के लिए प्रत्याशी बनाया है। उनका नाम सामने आने से पहले उत्तराखंड की इस राज्यसभा सीट के लिए भाजपा के भीतर कई नामों को लेकर चर्चा चल रही थी। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने अंततः दिनेश आर्य के नाम पर मुहर लगाई।
16 अक्टूबर को होगा चुनाव
उत्तराखंड में राज्यसभा की एक सीट के लिए 16 अक्टूबर 2026 को चुनाव प्रस्तावित है। मौजूदा राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल का कार्यकाल पूरा होने के कारण यह सीट रिक्त हो रही है। इसी सीट के लिए भाजपा ने दिनेश आर्य को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।
राज्यसभा चुनाव में भाजपा द्वारा दिनेश आर्य को प्रत्याशी बनाए जाने को उत्तराखंड की आगामी राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उनके चयन के राजनीतिक प्रभाव को लेकर अलग-अलग राजनीतिक विश्लेषण सामने आ रहे हैं।



