
देहरादून। सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल लोगों की जान बचाने के लिए शुरुआती मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर प्राथमिक सहायता, एंबुलेंस की उपलब्धता और अस्पताल में त्वरित चिकित्सकीय हस्तक्षेप से गंभीर मरीजों के बचने की संभावना बढ़ सकती है। विश्व ट्रॉमा दिवस के अवसर पर श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में आयोजित जागरूकता एवं शैक्षणिक कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने यह बात कही। उन्होंने आधुनिक ट्रॉमा प्रबंधन, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण की अहमियत पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का शुभारंभ एम्स ऋषिकेश के ट्रॉमा सर्जरी एवं क्रिटिकल केयर विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और एयरोमेडिकल सेवाओं के प्रभारी डॉ. मधुर उनियाल, श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज के प्राचार्य डॉ. उत्कर्ष शर्मा, श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल मलिक, इमरजेंसी मेडिसिन विभाग की प्रमुख डॉ. रोबिना मक्कड़ और ट्रॉमा सर्जन डॉ. संतोष बालाचंद्रा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
मुख्य वक्ता डॉ. मधुर उनियाल ने कहा कि दुर्घटना के बाद शुरुआती समय में घायल व्यक्ति को उचित सहायता मिलना बेहद जरूरी है। गंभीर चोटों के मामलों में रक्तस्राव पर नियंत्रण, सांस और रक्त संचार की स्थिति का आकलन तथा समय पर उपचार जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित चिकित्सा टीम और व्यवस्थित ट्रॉमा प्रबंधन से गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है।
डॉ. उत्कर्ष शर्मा ने कहा कि ट्रॉमा मरीजों के उपचार में समयबद्ध चिकित्सकीय निर्णय और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन आवश्यक है। अस्पताल पहुंचने पर मरीज की सांस, रक्त संचार, चेतना और चोटों की गंभीरता का तत्काल आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और इमरजेंसी टीम के बीच बेहतर समन्वय के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर दिया।
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल मलिक ने कहा कि आधुनिक ट्रॉमा केयर में गंभीर चोटों की शीघ्र पहचान, त्वरित जांच और मरीज की स्थिति की लगातार निगरानी जरूरी है। आवश्यकता के अनुसार तत्काल सर्जिकल उपचार और रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।
इमरजेंसी मेडिसिन विभाग की प्रमुख डॉ. रोबिना मक्कड़ ने कहा कि ट्रॉमा मरीजों की देखभाल में नर्सिंग स्टाफ की भूमिका अहम है। मरीज की स्थिति का त्वरित आकलन, सांस, नाड़ी और रक्तचाप की निगरानी तथा चिकित्सकीय निर्देशों का समय पर पालन उपचार की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आपातकालीन परिस्थितियों में नर्सिंग टीम की दक्षता और चिकित्सकों के साथ समन्वय से मरीज को बेहतर देखभाल मिलती है।
ट्रॉमा सर्जन डॉ. संतोष बालाचंद्रा ने कहा कि दुर्घटना के बाद अत्यधिक रक्तस्राव, सिर में गंभीर चोट और सांस संबंधी समस्याओं का समय पर उपचार नहीं होने पर स्थिति जानलेवा हो सकती है। उन्होंने दुर्घटनास्थल पर प्राथमिक सहायता, एंबुलेंस की त्वरित उपलब्धता और अस्पताल में तत्काल उपचार को जीवनरक्षक बताया। उन्होंने लोगों से यातायात नियमों का पालन करने, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करने तथा दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने की अपील की।
कार्यक्रम में श्री गुरु राम राय स्कूल ऑफ नर्सिंग की छात्राओं ने नुक्कड़ नाटिका के माध्यम से सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को प्राथमिक सहायता देने और समय पर अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। इसके जरिए दुर्घटना पीड़ितों की मदद, प्राथमिक उपचार और त्वरित चिकित्सा सुविधा के महत्व का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य ट्रॉमा के प्रति जागरूकता बढ़ाने, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की भूमिका को रेखांकित करने और दुर्घटना पीड़ितों को समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराने के प्रति लोगों को जागरूक करना रहा।




