
मुख्यमंत्री के आश्वासन पर प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की उम्मीद के साथ प्रदर्शन समाप्त, सात सूत्रीय मांगपत्र सौंपा
देहरादून। सीटू से संबद्ध उत्तराखंड आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री यूनियन के बैनर तले सोमवार को प्रदेशभर की आशा कार्यकत्रियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर गांधी पार्क से सचिवालय तक विशाल जुलूस निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व सीटू के राज्य सचिव लेखराज ने किया। इस दौरान आशा कार्यकत्रियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मानदेय बढ़ाने, कर्मचारी का दर्जा देने और सामाजिक सुरक्षा सहित सात सूत्रीय मांगों के समाधान की मांग उठाई। मुख्यमंत्री के ओएसडी भुवन चंद जोशी और नगर मजिस्ट्रेट की ओर से प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का आश्वासन दिए जाने के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया।
गांधी पार्क में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए सीटू राज्य सचिव लेखराज ने कहा कि आशा कार्यकत्रियां प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन सरकार उनके श्रम और योगदान की लगातार अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि तीन मार्च 2024 को मुख्यमंत्री ने आशाओं का मानदेय बढ़ाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने आशाओं को सम्मानजनक वेतन, कर्मचारी का दर्जा और सामाजिक सुरक्षा देने की मांग की।

यूनियन की प्रांतीय अध्यक्ष शिवा दुबे, कोषाध्यक्ष कलावती चंदोला, महामंत्री लोकेश देवी और जिलाध्यक्ष सुनीता चौहान ने कहा कि आशा कार्यकत्रियां वर्षों से बेहद कम मानदेय पर स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं। महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। सीपीआई (एम) के जिला सचिव एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिव प्रसाद देवली और सीटू के जिला सचिव हिमांशु चौहान ने भी आंदोलन को समर्थन देते हुए आशाओं की मांगों को न्यायोचित बताया।
मुख्यमंत्री को भेजे गए सात सूत्रीय मांगपत्र में वर्तमान तीन हजार रुपये मासिक मानदेय और 10 प्रतिशत इंसेंटिव की व्यवस्था में सुधार कर भुगतान सीधे स्वास्थ्य विभाग से कराने, 42 हजार रुपये वार्षिक प्रोत्साहन राशि के स्थान पर नियमित मासिक वेतन देने, ईपीएफ और ईएसआई की सुविधा उपलब्ध कराने तथा सेवानिवृत्ति पर पेंशन और पांच लाख रुपये की एकमुश्त धनराशि देने की मांग की गई। इसके अलावा प्रत्येक केंद्र में आशाघर बनाने, 46वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशें लागू कर आशाओं को कर्मचारी घोषित करने, मुख्यमंत्री के मानदेय वृद्धि के वादे को पूरा करने और हाईपावर कमेटी की कार्रवाई सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई गई। यूनियन ने चार श्रम संहिताओं के श्रमिक विरोधी प्रावधानों में संशोधन की मांग भी की।

यूनियन ने चेतावनी दी कि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो 11 नवंबर से प्रदेशभर की आशा कार्यकत्रियां कार्य बहिष्कार करेंगी। इसके साथ ही 18, 19 और 20 नवंबर को सचिवालय में सीटू की ओर से आयोजित महापड़ाव में भी आशाएं बड़ी संख्या में भाग लेंगी। वक्ताओं ने कहा कि आशाओं ने कोविड महामारी के दौरान ही नहीं, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में भी अग्रिम पंक्ति में रहकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके बावजूद उन्हें उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल रहा है।
प्रदर्शन में अनीता थापा, अनीता अग्रवाल, सरिता, सीमा शर्मा, पुष्पा खंडूरी, सुमनिता सेमवाल, बीना रावत, गायत्री, नीलम, मीनू, किरन, सोनी देवी, सावित्री देवी, प्रमिला देवी, सुमन देवी, ललिता रावल, कमला रौथाण, चमन शर्मा, मधु गर्ग, नीरू जैन, प्रीति रस्तोगी, अनुराधा, स्नेहलता, ऊषा, शिवकांता बेदी, साहिस्ता, नीलम ठाकुर और उर्मिला रोड़ा सहित बड़ी संख्या में आशा कार्यकत्रियां मौजूद रहीं।





