
नई दिल्ली।अंकिता भंडारी हत्याकांड में निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग को लेकर अंकिता के माता-पिता बुधवार को दिल्ली के राजघाट पहुंचे। उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना भी थीं। परिजनों का आरोप है कि सीबीआई ने कार्रवाई का भरोसा तो दिया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई अब तक नहीं हुई। इसी मांग को लेकर दोनों राजघाट पर मौन व्रत रखकर प्रार्थना कर रहे थे, तभी दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया।
योगिता भयाना का आरोप है कि राजघाट पर प्रार्थना कर रहे अंकिता के माता-पिता और उन्हें दिल्ली पुलिस ने जबरन अपनी गाड़ी में बैठा लिया। उनके मुताबिक, पुलिस ने माता-पिता से कहा कि उन्हें मेडिकल मदद की जरूरत है और अस्पताल ले जाया जाएगा, लेकिन उन्हें किसी अस्पताल में नहीं ले जाया गया। योगिता का दावा है कि पुलिस की गाड़ी करीब 45 मिनट तक दिल्ली की सड़कों पर घूमती रही।
योगिता भयाना ने यह भी दावा किया कि इस दौरान अंकिता की मां की तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश हो गईं। उनका आरोप है कि रास्ते में कई अस्पताल पड़े, फिर भी पुलिस ने गाड़ी नहीं रोकी और तत्काल चिकित्सा सहायता नहीं दिलाई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अंकिता के परिजन केवल अपनी मांग रखने और प्रार्थना करने राजघाट पहुंचे थे, तो उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया। उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई को अनुचित बताया है।
इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। गोदियाल का कहना है कि अंकिता के पिता से फोन पर हुई बातचीत में उन्हें जानकारी मिली कि दिल्ली पुलिस माता-पिता को इंडिया गेट के पास से जबरन साथ ले गई और करीब दो घंटे तक इधर-उधर घुमाती रही। उनके मुताबिक, अंकिता की मां की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बुराड़ी के एक अस्पताल ले जाया गया। गोदियाल ने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह के देहरादून दौरे से पहले अंकिता के माता-पिता को इस तरह परेशान करना, डराना और धमकाना बिल्कुल अनुचित है। उन्होंने कहा कि दोनों शांतिप्रिय लोग हैं और उनसे किसी को कोई खतरा नहीं है। गोदियाल ने मांग की कि माता-पिता को तत्काल रिहा किया जाए और दिल्ली में रह रहे उत्तराखंड के सभी लोगों से उनसे संपर्क कर हरसंभव मदद करने की अपील की।




