
‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के तहत युवा संगम के सातवें चरण में प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन में प्राप्त किया मार्गदर्शन, केम्पटी में साहसिक खेलों में लिया हिस्सा
देहरादून। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ अभियान के तहत आयोजित युवा संगम के सातवें चरण में पश्चिम बंगाल से उत्तराखंड के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण पर आया प्रतिनिधिमंडल प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और साहसिक गतिविधियों से रूबरू हो रहा है। भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मुलाकात की और उनके साथ संवाद कर राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विविधता तथा युवा शक्ति की भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण विचार साझा किए। इसके साथ ही मसूरी के केम्पटी स्थित हिमालयन एडवेंचर इंस्टीट्यूट में रॉक क्लाइंबिंग, जिपलाइन और ट्रैकिंग जैसी गतिविधियों का रोमांच भी महसूस किया।
राजभवन में आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम में राज्यपाल ने पश्चिम बंगाल से आए छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल के प्रत्येक सदस्य से परिचय प्राप्त करने के साथ उनके गृह क्षेत्रों और उत्तराखंड भ्रमण के अनुभवों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक, भाषाई और भौगोलिक विविधता में निहित है। पश्चिम बंगाल की समृद्ध साहित्यिक एवं बौद्धिक परंपरा और उत्तराखंड की आध्यात्मिक तथा प्राकृतिक विरासत का आपसी जुड़ाव राष्ट्रीय एकता को और मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि युवा देश के भविष्य के वाहक हैं और ऐसे अंतरराज्यीय कार्यक्रम उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाने के साथ विभिन्न राज्यों की संस्कृति को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से उत्तराखंड की अच्छी यादें और अनुभव लेकर जाने तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
संवाद के बाद राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को स्मृति स्वरूप उपहार भेंट किए। इस अवसर पर युवा संगम की उत्तराखंड में नोडल एजेंसी हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के नोडल अधिकारी प्रो. महावीर सिंह नेगी ने विश्वविद्यालय की ओर से राज्यपाल को स्मृति चिह्न प्रदान किया। पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधिमंडल के संकाय सदस्यों ने भी राज्यपाल को मोमेंटो भेंट कर आभार व्यक्त किया।

राजभवन भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने ऐतिहासिक राष्ट्रपति निकेतन, आधुनिक संग्रहालय और पुरानी घुड़साल का भी अवलोकन किया। संबंधित अधिकारियों ने विद्यार्थियों को इन स्थलों के ऐतिहासिक महत्व, स्थापत्य कला और विरासत से जुड़ी जानकारियां दीं। इस भ्रमण ने विद्यार्थियों को उत्तराखंड के इतिहास और गौरवशाली अतीत को करीब से समझने का अवसर दिया।
इससे पहले प्रतिनिधिमंडल ने मसूरी के केम्पटी स्थित हिमालयन एडवेंचर इंस्टीट्यूट में साहसिक गतिविधियों का अनुभव किया। संस्थान में विद्यार्थियों ने रॉक क्लाइंबिंग, जिपलाइन, ट्रैकिंग सहित विभिन्न खेल एवं मनोरंजक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। संस्थान के संस्थापक एवं राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित पूर्व डीआईजी एसपी चमोली, नवीन चमोली तथा चमोली परिवार ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया। इस दौरान एसपी चमोली ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए युवाओं को अनुशासन, दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास का महत्व समझाया। साथ ही हिमालयी पर्यावरण के संरक्षण के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश भी दिया।
नोडल अधिकारी प्रो. महावीर सिंह नेगी ने संस्थान के संस्थापक एसपी चमोली, नवीन चमोली और पूरे संस्थान परिवार का आतिथ्य एवं बेहतर व्यवस्थाओं के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के अनुभव युवाओं को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर प्रकृति, साहसिक गतिविधियों और स्थानीय परिवेश को समझने का अवसर देते हैं।

इस पूरे कार्यक्रम के सफल संचालन में गढ़वाल विश्वविद्यालय की फैकल्टी टीम के साथ आईआईटी खड़गपुर के संकाय सदस्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रो. महावीर सिंह नेगी के नेतृत्व में डॉ. हिमशिखा गुसाईं, डॉ. सर्वेश उनियाल और डॉ. नरेंद्र लगातार प्रतिनिधिमंडल के साथ रहकर समन्वय, मार्गदर्शन और व्यवस्थाओं का संचालन कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल से आए प्रतिनिधियों का यह प्रवास दो राज्यों के बीच शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को नई मजबूती देने के साथ ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को भी साकार कर रहा है।



