
देहरादून। राजपुर थाना क्षेत्र के कुठाल गेट स्थित पद्मश्री सम्मानित प्लास्टिक सर्जन डॉ. योगी ऐरन की संपत्ति ‘जंगल-मंगल’ में करीब 50 लोगों के कथित रूप से जबरन प्रवेश करने और तोड़फोड़ करने का मामला सामने आया है। डॉ. ऐरन की ओर से दी गई शिकायत के मुताबिक, मंगलवार सुबह लगभग छह बजे महिला और पुरुषों का एक समूह परिसर के पिछले रास्ते से अंदर दाखिल हुआ। आरोप है कि शुरुआत में कर्मचारियों को लगा कि लोग सामान्य रूप से वहां आए हैं, लेकिन कुछ देर बाद उन्होंने परिसर में रखा सामान हटाना शुरू कर दिया। विरोध करने पर आरोपितों ने कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी और तोड़फोड़ करने के बाद वहां से चले गए।
87 वर्षीय डॉ. योगी ऐरन ने पुलिस को बताया कि वह अपनी वृद्ध पत्नी के साथ इसी परिसर में रहते हैं और घटना के बाद से दोनों भयभीत हैं। उन्होंने शिकायत के साथ घटना से संबंधित फोटो, वीडियो और ऑडियो साक्ष्य भी पुलिस को सौंपे हैं। डॉ. ऐरन के अनुसार, वह वर्ष 1982 से ‘जंगल-मंगल’ संपत्ति में रह रहे हैं। उनका आरोप है कि राजपुर क्षेत्र की प्रमुख लोकेशन पर स्थित इस जमीन को लेकर कुछ लोगों की नजर है। उन्हें आशंका है कि यदि इस हरे-भरे परिसर को खरीदकर निर्माण कार्य किया गया, तो यहां की प्राकृतिक हरियाली नष्ट हो सकती है। उन्होंने संपत्ति के मौजूदा स्वरूप और हरियाली को बचाने का संकल्प जताया। साथ ही स्पष्ट किया कि पास की किसी अन्य संपत्ति से संबंधित विवाद का उनकी जमीन से कोई संबंध नहीं है।
राजपुर थाना प्रभारी पीडी भट्ट के मुताबिक, डॉ. ऐरन की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दूसरे पक्ष को वहां से हटाया और मामले की जांच कुठाल गेट चौकी प्रभारी को सौंपी है। पुलिस ने दोनों पक्षों से जमीन के स्वामित्व से जुड़े मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। इसके अलावा, संपत्ति की वास्तविक स्थिति और सीमाओं का पता लगाने के लिए राजस्व विभाग से सीमांकन कराकर रिपोर्ट मांगी गई है। शिकायत के अनुसार, वर्ष 1982 में कराई गई रजिस्ट्री में जमीन का कुल क्षेत्रफल स्पष्ट नहीं है। ऐसे में पुलिस यह पता लगाने के लिए दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है कि जमीन किससे खरीदी गई थी और उसका वास्तविक रकबा कितना है। आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए डॉ. ऐरन को बयान दर्ज कराने के लिए भी बुलाया गया है।
डॉ. योगी ऐरन चिकित्सा और समाजसेवा के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए जाने जाते हैं। वह अब तक पांच हजार से अधिक लोगों की निःशुल्क प्लास्टिक सर्जरी कर चुके हैं। जरूरतमंदों की सेवा में उनके योगदान के लिए वर्ष 2020 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। उन्होंने वर्ष 1966 से 1984 तक अमेरिका में मेडिकल प्रैक्टिस की और इसके बाद भारत लौटकर समाजसेवा के कार्यों को आगे बढ़ाया। वह ‘हेल्पिंग हैंड’ संस्था का संचालन भी करते हैं, जिसके माध्यम से अमेरिकी चिकित्सकों के सहयोग से जरूरतमंद लोगों के लिए निःशुल्क सर्जरी शिविर आयोजित किए जाते हैं। फिलहाल ‘जंगल-मंगल’ संपत्ति को लेकर सामने आए इस मामले में पुलिस जमीन के दस्तावेजों, सीमांकन और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर जांच कर रही है।



