
मोथरोवाला में टिहरी विस्थापितों की जमीन का सौदा कराने का दिया था झांसा, रजिस्टर्ड पावर ऑफ अटॉर्नी और एग्रीमेंट के जरिए ठगी का आरोप
देहरादून। राजधानी देहरादून में जमीन की खरीद-फरोख्त के नाम पर 25 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। मोथरोवाला क्षेत्र में टिहरी विस्थापितों की जमीन दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से लाखों रुपये हड़पने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में टिहरी गढ़वाल निवासी महावीर पडियार, मनोहर लाल समेत अन्य लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि रजिस्टर्ड पावर ऑफ अटॉर्नी और रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के जरिए पीड़ित को भरोसे में लेकर जमीन का सौदा कराया गया, जबकि संबंधित जमीन पर आरोपियों का वैध मालिकाना हक नहीं था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, देहरादून निवासी एक व्यक्ति को मोथरोवाला क्षेत्र में टिहरी विस्थापितों की जमीन दिलाने का प्रस्ताव दिया गया था। इस दौरान टिहरी गढ़वाल निवासी महावीर पडियार और मनोहर लाल सहित अन्य लोगों ने जमीन का सौदा कराने का भरोसा दिलाया। पीड़ित को विश्वास में लेकर जमीन से संबंधित दस्तावेज तैयार किए गए और इसी आधार पर उससे करीब 25 लाख रुपये प्राप्त कर लिए गए।
पीड़ित का आरोप है कि आरोपियों ने उसे भरोसा दिलाया था कि जमीन का सौदा पूरी तरह वैध है और सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उसे जमीन का मालिकाना हक मिल जाएगा। इसी भरोसे में आकर उसने बड़ी रकम आरोपियों को दे दी। हालांकि, रकम देने के बाद जब उसने जमीन के दस्तावेजों और वास्तविक स्वामित्व की जानकारी जुटाई तो कथित तौर पर पता चला कि जिस जमीन का सौदा कराया जा रहा था, वह आरोपियों के नाम पर दर्ज ही नहीं थी। इसके बाद पीड़ित को अपने साथ हुई कथित धोखाधड़ी का एहसास हुआ।
मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। पीड़ित के मुताबिक, धोखाधड़ी में कथित रूप से शामिल मुख्य व्यक्ति टिहरी गढ़वाल के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में सरकारी कर्मचारी है। आरोप है कि सरकारी सेवा में कार्यरत होने के बावजूद उसने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर जमीन के सौदे के नाम पर पीड़ित से 25 लाख रुपये हासिल किए।
अपने साथ हुई कथित धोखाधड़ी से परेशान पीड़ित ने अब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी), देहरादून को शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पीड़ित ने शिकायत में संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने और अपनी 25 लाख रुपये की रकम वापस दिलाने की गुहार लगाई है।
फिलहाल, पीड़ित की ओर से लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है। मामले में जांच के बाद ही धोखाधड़ी के आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




