
‘सिट एंड ड्रॉ’ प्रतियोगिता में 275 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा, पहली बार ‘वैली ऑफ वर्ड्स’ के साथ सजा साहित्यिक मंच ‘वॉव एट विरासत’
देहरादून । रीच संस्था की ओर से आयोजित विरासत महोत्सव में शुक्रवार को कला, साहित्य, कविता और संगीत का अनूठा संगम देखने को मिला। एक ओर जहां स्कूली बच्चों ने ‘सिट एंड ड्रॉ’ प्रतियोगिता में अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए शहर और प्रकृति की खूबसूरती को रंगों के माध्यम से कागज पर उकेरा, वहीं पहली बार महोत्सव के साथ जुड़े ‘वैली ऑफ वर्ड्स’ ने ‘वॉव एट विरासत’ के विशेष आयोजन के जरिए साहित्य और संगीत की समृद्ध परंपरा को मंच प्रदान किया।
हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित ‘सिट एंड ड्रॉ’ प्रतियोगिता में 13 विद्यालयों के विद्यार्थियों सहित कुल 275 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। प्रतियोगिता का विषय ‘माय सिटी एंड नेचर’ (मेरा शहर और प्रकृति) रखा गया था। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को अपने शहर, आसपास के परिवेश, प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण के प्रति अपने विचारों को चित्रों के जरिए अभिव्यक्त करने का अवसर मिला। बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता और रंगों के संयोजन से आकर्षक कलाकृतियां तैयार कीं।

प्रतियोगिता में स्मॉल बेल्स (मल्टी एक्टिविटी हब), दून प्रेसीडेंसी स्कूल, सेंट जूड्स स्कूल, ब्रुकलिन स्कूल, दून सरला अकादमी, पीएम श्री गवर्नमेंट गर्ल्स इंटर कॉलेज (आसरा ट्रस्ट), फ्लाईफोट पब्लिक स्कूल, दून इंटरनेशनल स्कूल सिटी कैंपस, श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल बालावाला, ज्ञानंदा स्कूल फॉर गर्ल्स, दिल्ली पब्लिक स्कूल विकासनगर, आर्मी पब्लिक स्कूल क्लेमेंट टाउन और वेलहम बॉयज़ स्कूल के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।
वहीं, ‘वैली ऑफ वर्ड्स’ के साथ पहली बार आयोजित ‘वॉव एट विरासत’ में साहित्य, कविता, पुस्तक चर्चा और संगीत के जरिए उत्तराखंड तथा हिंदी साहित्य की समृद्ध विरासत को सामने लाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सचिन चौहान के स्वागत संबोधन से हुआ। इसके बाद राजकुमार पंवार की पुस्तक ‘अब हुआ सवेरा’ पर सोमेश्वर पांडे के साथ विशेष चर्चा हुई।
कार्यक्रम में प्रख्यात हिंदी गीतकार बुद्धिनाथ मिश्र की संपूर्ण काव्य रचनाओं पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। उत्तराखंड राज्य के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ‘उत्तराखंड के 25 वर्ष’ पुस्तक पर भी परिचर्चा हुई। इसमें पुस्तक के संपादक संजीव चोपड़ा और सह-संपादक गंधर्व गोपाल जोशी ने राजलक्ष्मी दत्ता के साथ संवाद किया। सत्र की अध्यक्षता मनोज बर्थवाल ने की।

हिंदी कविता सत्र में श्रुति वत्स, सोमेश्वर पांडे और भारती मिश्र ने अपनी कविताओं का पाठ किया। इसका संचालन सचिन चौहान ने किया, जबकि अध्यक्षता बुद्धिनाथ मिश्र ने की। आयोजन का समापन पंजाबी के महान कवि शिव कुमार बटालवी के गीतों की संगीतमय प्रस्तुति के साथ हुआ। अभिनव त्यागी ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को भावविभोर किया।
इस अवसर पर विरासत महोत्सव के निदेशक डॉ. संजीव चोपड़ा ने कहा कि वैली ऑफ वर्ड्स और विरासत का एक साथ आना दो धाराओं के संगम जैसा है। उन्होंने इस साझेदारी को साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
इस तरह विरासत महोत्सव में बच्चों की कलात्मक प्रतिभा से लेकर साहित्यकारों की रचनात्मक अभिव्यक्ति और संगीत की सुरमयी प्रस्तुतियों तक, विविध सांस्कृतिक रंग देखने को मिले।



