
देहरादून। नर्सिंग अधिकारियों की वर्षवार भर्ती समेत विभिन्न मांगों को लेकर नर्सिंग एकता मंच का धरना रविवार को 303वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों का कहना है कि बदलते मौसम की तमाम चुनौतियों के बावजूद उनके संघर्ष और हौसले में कोई कमी नहीं आई है।
नर्सिंग कर्मियों का कहना है कि जब वे नर्सिंग अधिकारी भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, उस समय सरकार द्वारा बार-बार परीक्षा रद्द की गई और बाद में भर्ती प्रक्रिया को वर्षवार आधार पर आगे बढ़ाया गया। अब जब कई अभ्यर्थियों का वर्षवार भर्ती में नंबर आने का समय आया है और कई अभ्यर्थी ओवरएज हो चुके हैं, ऐसे समय में दोबारा परीक्षा कराई जा रही है।
आंदोलनकारियों के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया में हुई देरी के कारण कई योग्य अभ्यर्थियों की आयु सीमा निकल गई और वे वर्तमान में निजी अस्पतालों में नौकरी कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। उनका सवाल है कि जब वे परीक्षा देने के लिए तैयार थे, तब उन्हें परीक्षा का अवसर क्यों नहीं दिया गया और अब वर्षवार प्रक्रिया में उनका नंबर आने के समय फिर परीक्षा की शर्त क्यों लगाई जा रही है?
नर्सिंग एकता मंच ने इसे अभ्यर्थियों के साथ दोहरा रवैया और अन्याय बताते हुए मांग की है कि वर्षवार भर्ती का लाभ दिया जाए तथा भर्ती में हुई देरी से प्रभावित अभ्यर्थियों को उचित आयु सीमा में छूट प्रदान की जाए।
मंच ने स्पष्ट कहा, “हम परीक्षा के विरोध में नहीं हैं, हम ऐसी व्यवस्था के विरोध में हैं जिसमें सरकार की देरी और बदले हुए नियमों का खामियाजा अभ्यर्थियों को भुगतना पड़े।”
आंदोलनकारियों ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस एवं सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
धरनास्थल पर नवल पुंडीर, राजेंद्र कुकरेती, भास्कर, प्रवेश रावत, मुकेश रमोला, जतिन सहित अन्य नर्सिंग कर्मी मौजूद रहे।



