
65 से अधिक कर्मचारी-शिक्षक संगठनों का समर्थन, मुख्यमंत्री आवास कूच के दौरान पुलिस से झड़प और धक्कामुक्की में कई कार्मिक घायल; मुख्यमंत्री कार्यालय ने जल्द वार्ता का दिया लिखित आश्वासन
देहरादून। पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर सोमवार को राजधानी देहरादून में हजारों शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा उत्तराखंड (एनओपीआरयूएफ) के आह्वान पर आयोजित पेंशन आर-पार महारैली में प्रदेशभर के 65 से अधिक कर्मचारी एवं शिक्षक संगठनों ने समर्थन दिया। विभिन्न निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों के कार्मिकों की भागीदारी से आंदोलन को व्यापक स्वरूप मिला। कर्मचारियों ने परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच कर पुरानी पेंशन बहाली की मांग उठाई।
मुख्यमंत्री आवास कूच के दौरान पुलिस की ओर से लगाए गए बैरिकेडिंग पर आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। पहला बैरिकेड पार करने के बाद दूसरे बैरिकेड पर भारी धक्कामुक्की हुई, जिसमें कई कर्मचारियों को चोटें आईं। घायलों में मोर्चे के प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल भी शामिल रहे। इसके बावजूद आंदोलनकारी काफी देर तक मौके पर डटे रहे और पुरानी पेंशन बहाली की मांग पर सरकार से ठोस निर्णय लेने की मांग करते रहे।

प्रदर्शन के दौरान बनी स्थिति के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने आंदोलन का संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री के उत्तराखंड से बाहर होने के कारण उनके समन्वयक गढ़कोटी ने आंदोलनकारी प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की। प्रतिनिधिमंडल को लिखित आश्वासन दिया गया कि नौ नवंबर को राज्य स्थापना दिवस और मुख्यमंत्री के पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के चलते तत्काल वार्ता संभव नहीं है, लेकिन मुख्यमंत्री से कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों की मुलाकात और वार्ता जल्द सुनिश्चित कराई जाएगी।

मोर्चे ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के साथ प्रस्तावित वार्ता महज औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि पुरानी पेंशन बहाली पर ठोस और सकारात्मक निर्णय की दिशा में आगे बढ़नी चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांग पर गंभीरता नहीं दिखाई और वार्ता का सार्थक परिणाम नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इसके तहत प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार, चॉकडाउन सहित अन्य लोकतांत्रिक आंदोलनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
महारैली को उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन, राज्यीय शिक्षक संघ, अनुसूचित जाति एवं जनजाति शिक्षक एसोसिएशन, उत्तराखंड फॉरेस्ट मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन, उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग संयुक्त महासंघ, असासकीय माध्यमिक शिक्षक संघ, उत्तराखंड एनजीओ फेडरेशन, उत्तराखंड मेडिकल लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन, उत्तरांचल प्रधानाचार्य परिषद, स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन समेत विभिन्न विभागों और जनपदों के संगठनों का समर्थन मिला। आयुर्वेदिक एवं यूनानी फार्मासिस्ट एसोसिएशन की विभिन्न जिला इकाइयों सहित निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों ने भी भागीदारी की।

मोर्चे ने महारैली में शामिल हुए कर्मचारियों, शिक्षकों, अधिकारियों, महिला एवं युवा कार्मिकों और समर्थन देने वाले सभी संगठनों का आभार जताया। संगठन ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली की मांग अब किसी एक विभाग या संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों के सम्मान, सुरक्षित भविष्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा सामूहिक मुद्दा बन चुकी है। मोर्चे ने दोहराया कि पुरानी पेंशन बहाली तक संघर्ष जारी रहेगा।




