
क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल में पूर्व डीजीपी अशोक कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने साझा किए अपराध, आंतरिक सुरक्षा और मानवाधिकारों से जुड़े अनुभव
देहरादून । विरासत महोत्सव-2026 के तहत शनिवार को हिमालयन कल्चरल सेंटर, निंबूवाला में ज्ञान, प्रतिभा और जनजागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। महोत्सव की एजुकेशनल स्टेज पर जहां 19 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने हेरिटेज क्विज प्रतियोगिता में अपनी बौद्धिक क्षमता और प्रतिभा का प्रदर्शन किया, वहीं दूसरे सत्र में आयोजित क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल में अपराध, पुलिस व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और मानवाधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा हुई।
रीच संस्था की ओर से आयोजित हेरिटेज क्विज प्रतियोगिता में विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों से विविध विषयों पर आधारित प्रश्न पूछे गए, जिनका उन्होंने अपनी ज्ञान क्षमता और त्वरित सोच के आधार पर जवाब दिया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद चार टीमों ने अगले चरण में जगह बनाई। इनमें ओक ग्रोव स्कूल की दो टीमें, समर वैली स्कूल की एक टीम और द ओएसिस स्कूल की एक टीम शामिल रही। प्रत्येक टीम में दो विद्यार्थी थे। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में ज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने के साथ उनकी तार्किक क्षमता और आत्मविश्वास को बढ़ावा देना रहा।
वहीं, महोत्सव का दूसरा सत्र क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल के नाम रहा। दून कल्चरल एंड लिटरेरी सोसाइटी (DCLS) की ओर से प्रस्तुत इस आयोजन में उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया। वक्ताओं ने अपराध साहित्य, भारतीय पुलिस व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा, अपराध मनोविज्ञान और मानवाधिकारों से जुड़े विषयों पर अपने अनुभव साझा किए और लोगों को विभिन्न आपराधिक घटनाओं के प्रति जागरूक रहने के महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

कार्यक्रम की शुरुआत ‘द जर्नी सो फार, द रोड अहेड’ सत्र से हुई। इसमें अशोक कुमार, आलोक लाल और रूपा सोनी ने क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल के चार वर्षों के सफर, उपलब्धियों, महत्वपूर्ण संवादों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। इसके बाद ‘सिक्योरिंग टुमारो’ सत्र में भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श हुआ। यह चर्चा अशोक कुमार की पुस्तक ‘चैलेंजेज टू इंटरनल सिक्योरिटी ऑफ इंडिया’ के आठवें संस्करण पर आधारित रही। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्मकार सतीश शर्मा के साथ संवाद भी हुआ।
‘बिहाइंड द बैज’ सत्र में यशोवर्धन आजाद और ताज हसन ने भारतीय पुलिस व्यवस्था के अनुभवों और उसके भीतर की अनकही कहानियों को साझा किया। सत्र का संचालन अनुपमा खन्ना ने किया। वहीं, ‘द लॉन्ग आर्म ऑफ द लॉ’ सत्र में आलोक लाल और मानस लाल ने कानून की पहुंच, अपराध नियंत्रण और अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकानों की अनुपस्थिति जैसे विषयों पर विचार रखे। इस दौरान आरजे काव्या ने भी अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम के एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र ‘इनसाइड द क्रिमिनल माइंड’ में निजी जासूस देव ने डॉ. रूबी गुप्ता के साथ संवाद किया। इसमें प्रेम, विश्वासघात, जुनून और प्रतिशोध जैसे पहलुओं के माध्यम से अपराधी मनोविज्ञान को समझने का प्रयास किया गया। वक्ताओं ने अपराधियों की मानसिकता, आपराधिक व्यवहार और अपराध के पीछे छिपे कारणों पर प्रकाश डालते हुए विशेष रूप से वैवाहिक अपराधों के प्रति जागरूकता, रिश्तों में आपसी सम्मान और कानून के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया।

आयोजकों के अनुसार, क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल का उद्देश्य साहित्य और संवाद के माध्यम से अपराध एवं सुरक्षा से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन तक पहुंचाना है, ताकि लोग अपने अधिकारों, कानून और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बन सकें।



