
पहली सूची में पहाड़ से लेकर मैदान तक के चेहरों को मौका, संगठन के प्रति निष्ठा और उत्तराखंड के मुद्दों पर संघर्ष को बनाया चयन का आधार
देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज करनी शुरू कर दी हैं। चुनावी रणभेरी बजने से पहले ही उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर प्रदेश की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। पार्टी ने अपनी पहली सूची में 16 विधानसभा क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। इस सूची के जरिए दल ने साफ संकेत दिया है कि वह आगामी चुनाव को लेकर केवल रणनीति बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी भी शुरू कर चुका है।
UKD की ओर से जारी सूची में अनुभवी राजनीतिक चेहरों के साथ संगठन से लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं को भी स्थान दिया गया है। पार्टी ने प्रत्याशियों के चयन में संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, समर्पण और उत्तराखंड के हितों से जुड़े मुद्दों पर उनके संघर्ष को प्रमुख आधार बताया है। दल का मानना है कि राज्य की मूल समस्याओं, क्षेत्रीय अस्मिता और जनहित के सवालों को मजबूती से उठाने वाले कार्यकर्ताओं को चुनावी जिम्मेदारी सौंपना जरूरी है।

पार्टी की पहली सूची में पिथौरागढ़ से काशी सिंह ऐरी, द्वाराहाट से पुष्प त्रिपाठी, देवप्रयाग से पूरन सिंह कठैत, प्रतापनगर से पंकज व्यास, कर्णप्रयाग से आशीष नेगी, जागेश्वर से दिनेश कुंजवाल, राजपुर से देव चंद उत्तराखंडी, सल्ट से प्रताप सिंह, टिहरी से डी.डी. पंत, कपकोट से वरुण चंदोला, काशीपुर से प्रदीप चंद, नानकमत्ता से कैलाश सिंह पांगती, रामनगर से भुवन चंद, देहरादून कैंट से राजेंद्र सिंह नेगी, खानपुर से रितु कंडियाल जुगवाल और धनोल्टी से चंदन सिंह राणा को प्रत्याशी घोषित किया गया है।
UKD के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती के अनुसार, पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संगठनात्मक स्तर पर लगातार तैयारियों में जुटी है। उन्होंने संकेत दिया कि प्रत्याशियों की दूसरी सूची भी जल्द जारी की जाएगी। पहली सूची के बाद अब शेष विधानसभा क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवारों को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है।

राजनीतिक दृष्टि से UKD का समय से पहले प्रत्याशियों के नाम सामने लाना चुनावी तैयारी के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इससे घोषित उम्मीदवारों को अपने-अपने क्षेत्रों में जनसंपर्क बढ़ाने, संगठन को सक्रिय करने और स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंचने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। अब निगाहें पार्टी की अगली सूची और इस घोषणा के बाद प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ने वाले संभावित असर पर टिकी हैं।



