
अधिवक्ता विदुषी पांडेय की प्रभावी पैरवी, माहिम वर्मा ने फैसले को बताया सत्य और न्याय की जीत
नई दिल्ली । क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। एसोसिएशन के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया और हाईकोर्ट के सीबीआई जांच संबंधी निर्देश पर अंतरिम रोक लगा दी।
दरअसल, क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुलिस पहले ही जांच कर चुकी थी। पुलिस जांच से असंतुष्ट शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई से कराने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट के इस आदेश को एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट में एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता विदुषी पांडेय ने प्रभावी पैरवी की। उनकी दलीलों के बाद शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के सीबीआई जांच संबंधी आदेश पर रोक लगाते हुए एसोसिएशन को राहत प्रदान की। एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए न्यायिक प्रक्रिया में अपना विश्वास जताया है।
इस फैसले पर बीसीसीआई के पूर्व उपाध्यक्ष एवं क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के पूर्व पदाधिकारी माहिम वर्मा ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश एसोसिएशन के लिए बड़ी राहत है और यह सत्य एवं न्याय की जीत है। पिछले कई वर्षों से आधारहीन आरोपों के जरिए एसोसिएशन की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जाता रहा है। पुलिस जांच में कोई अनियमितता सामने नहीं आई थी, इसके बावजूद बार-बार न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया।
माहिम वर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के निर्देश पर रोक लगाकर मामले में उचित दिशा दिखाई है। एसोसिएशन को न्यायिक प्रक्रिया पर हमेशा भरोसा रहा है और आगे भी रहेगा। उन्होंने एसोसिएशन की ओर से पैरवी करने वाली अधिवक्ता विदुषी पांडेय का विशेष आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि अब एसोसिएशन का पूरा ध्यान उत्तराखंड में क्रिकेट के विकास, खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और राज्य को राष्ट्रीय क्रिकेट मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने पर केंद्रित रहेगा।




