
श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर शिक्षा सचिव ज्योति यादव का किया स्वागत, सचिव ने की पहल की सराहना
गौचर। स्वागत और सम्मान समारोहों में फूलों के बुके के स्थान पर पुस्तक भेंट करने की अभिनव पहल ‘बुके नहीं, बुक’ अभियान धीरे-धीरे नई पहचान बना रहा है। चमोली के मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत की इस नवाचारी पहल का उद्देश्य सम्मान की परंपरा को ज्ञान, संस्कार और पठन संस्कृति से जोड़ना है।
इसी क्रम में गौचर पहुंचीं विद्यालयी शिक्षा सचिव ज्योति यादव का मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर सचिव ज्योति यादव ने ‘बुके नहीं, बुक’ अभियान की सराहना करते हुए इसे पुस्तकों के महत्व और समाज में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने वाली सराहनीय पहल बताया। इसके अलावा मुख्य शिक्षा अधिकारी ने शहरी विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव नितेश कुमार झा तथा ग्राम्य विकास विभाग के अपर सचिव मनोज गोयल का भी श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर स्वागत किया।
बुके की जगह पुस्तक भेंट करने का संदेश
आमतौर पर अतिथियों के स्वागत और सम्मान के लिए फूलों के बुके देने की परंपरा रही है, लेकिन बुके कुछ समय बाद मुरझा जाते हैं, जबकि पुस्तक व्यक्ति को लंबे समय तक ज्ञान और प्रेरणा देती है। इसी सोच के साथ ‘बुके नहीं, बुक’ अभियान शुरू किया गया है। मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने शिक्षा विभाग के कार्यालयों और विद्यालयों में आयोजित होने वाले समारोहों, प्रतियोगिताओं एवं सम्मान कार्यक्रमों में बुके के स्थान पर पुस्तक भेंट करने का आह्वान किया है। इसके लिए जनपद के खंड शिक्षा अधिकारियों और उप शिक्षा अधिकारियों को भी निर्देश जारी किए गए हैं।
पठन संस्कृति को बढ़ावा देना उद्देश्य
इस अभियान का उद्देश्य केवल स्वागत की परंपरा में बदलाव करना नहीं, बल्कि पुस्तकों के प्रति सम्मान बढ़ाना और विद्यार्थियों, शिक्षकों सहित समाज के सभी वर्गों में पढ़ने की आदत विकसित करना है। पुस्तकें ज्ञान, विचार और अनुभवों का ऐसा माध्यम हैं, जिनसे व्यक्ति लंबे समय तक लाभान्वित हो सकता है।
विद्यालयी शिक्षा सचिव ज्योति यादव द्वारा इस पहल की सराहना किए जाने से अभियान को प्रोत्साहन मिला है। श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर अतिथियों का स्वागत करना भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति सम्मान का भी प्रतीक है। मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत की यह पहल संदेश देती है कि सम्मान का उपहार ऐसा होना चाहिए, जो केवल औपचारिकता न रहकर ज्ञान और सकारात्मक सोच के प्रसार का माध्यम बने।



