
एम्स में कार्डियो डायबेटिक सोसाइटी का सातवां वार्षिक सम्मेलन शुरू, देशभर के विशेषज्ञों ने मधुमेह नियंत्रण और हृदय स्वास्थ्य पर साझा किए अनुभव
ऋषिकेश । एम्स ऋषिकेश में कार्डियो डायबेटिक सोसाइटी (सीडीएस) का सातवां वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में देशभर से पहुंचे चिकित्सा विशेषज्ञों ने मधुमेह के बेहतर प्रबंधन, हृदय रोगों से बचाव और मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार को लेकर व्यापक चर्चा की। विशेषज्ञों ने मधुमेह को हृदय रोगों का एक प्रमुख जोखिम कारक बताते हुए समय पर जांच, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को बेहद जरूरी बताया।
संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि डीन एकेडमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय ने किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन चिकित्सकों को नवीनतम शोध और चिकित्सा संबंधी साक्ष्य साझा करने के साथ ही उपचार की बेहतर पद्धतियों को मरीजों तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने इंसुलिन की खोज के महत्व के साथ चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की भूमिका को भी रेखांकित किया।
मेडिसिन विभागाध्यक्ष एवं सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष प्रो. रविकांत ने कहा कि मधुमेह हृदय रोगों का एक प्रमुख जोखिम कारक है। कार्डियो डायबेटिक सोसाइटी के माध्यम से मधुमेह और हृदय रोगों की देखभाल के लिए समेकित दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार, नियमित शारीरिक व्यायाम, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार से इन बीमारियों को नियंत्रित करने के साथ इनके जोखिम को कम किया जा सकता है। कार्यक्रम को चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पुनीत धमीजा ने भी संबोधित किया।

सम्मेलन के पहले दिन शोध प्रस्तुतियों के छह अलग-अलग सत्र आयोजित किए गए। इनमें विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण चिकित्सा विषयों पर व्याख्यान दिए। डॉ. के. बालामुरुगेशन ने जोखिम आकलन में नॉन-ग्लाइसेमिक मार्कर, डॉ. नवल विक्रम ने एडिपोसिटी आधारित कार्डियो मेटाबॉलिक डिसऑर्डर, डॉ. प्रीति ढोट ने महिलाओं में हृदय रोग, डॉ. भरत माहेश्वरी ने बुजुर्गों के पोषण आकलन, डॉ. सच्चिदानंद तिवारी ने मधुमेह की नई दवाओं और डॉ. नवदीप ने नवजात मधुमेह पर जानकारी दी।
सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों ने मधुमेह रोगियों और महिलाओं में हृदय रोगों के जोखिम, बुजुर्गों के संतुलित पोषण, ब्लड शुगर के निर्धारित लक्ष्यों और नवजात शिशुओं में मधुमेह जैसे विषयों पर भी चर्चा की। इसके अलावा मेटाबॉलिक सिंड्रोम में कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली स्टैटिन दवाओं के उपयोग, इंसुलिन के नए विकल्पों और गठिया सहित अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। टाइप-2 मधुमेह की समग्र देखभाल पर पैनल चर्चा भी आयोजित की गई।
इस अवसर पर मेडिसिन विभाग के डॉ. वेंकटेश पाई, डॉ. मुकेश बैरवा, डॉ. पी.के. पांडा, डॉ. दरब सिंह, डॉ. अखिलेश कुमार, कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्रिंसिपल प्रो. स्मृति अरोड़ा, डॉ. रोहित रैना, डॉ. ऋतु, डॉ. सुनील मिश्रा और डॉ. संजय शाह सहित कई चिकित्सा विशेषज्ञ मौजूद रहे।




