
SIR रद्द करने की मांग, राष्ट्रपति के नाम सौंपा संयुक्त ज्ञापन
देहरादून । मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में गुरुवार को देहरादून की सड़कों पर इंडिया गठबंधन के दलों और जनसंगठनों का जनसैलाब उतरा। गांधी पार्क से शुरू हुआ जुलूस राजपुर रोड होते हुए घंटाघर पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका। इसके बाद आमसभा हुई, जिसमें एक स्वर से ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करने की मांग उठाई गई। गठबंधन ने जिलाधिकारी, देहरादून के माध्यम से राष्ट्रपति को संयुक्त ज्ञापन भी भेजा।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि उत्तराखंड में SIR प्रक्रिया के दौरान लाखों वास्तविक, जीवित और पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। गठबंधन के मुताबिक, उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार SIR से पहले राज्य में 79,60,762 मतदाता थे, जो प्रक्रिया के बाद घटकर 71,58,949 रह गए। वर्ष 2022 में राज्य में कुल 82,66,644 मतदाता थे, यानी तब से अब तक 11,07,695 मतदाता कम हुए हैं।
जिलेवार आंकड़े गिनाते हुए गठबंधन ने बताया कि सबसे ज्यादा नाम उधम सिंह नगर में 1,86,315 कटे। इसके बाद देहरादून में 1,82,016, हरिद्वार में 1,30,964, नैनीताल में 67,588, अल्मोड़ा में 50,887, पौड़ी गढ़वाल में 47,692 और टिहरी गढ़वाल में 40,615 नाम हटाए गए। पिथौरागढ़ में 25,295, चमोली में 19,616, उत्तरकाशी में 17,772, चंपावत में 15,654, रुद्रप्रयाग में 9,159 और बागेश्वर में 8,240 मतदाताओं के नाम कटने का दावा किया गया है।
विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों के मुताबिक धर्मपुर में सबसे ज्यादा 57,318 नाम हटे। बीएचईएल रानीपुर में 45,342, हरिद्वार शहर में 45,231, देहरादून कैंट में लगभग 45,148, ऋषिकेश में लगभग 41,343, रायपुर में लगभग 40,452 और राजपुर रोड में 39,046 मतदाताओं के नाम कटे बताए गए हैं। मसूरी में लगभग 31,713, हल्द्वानी में 30,711 और झबरेड़ा में 11,809 नाम हटाने की बात भी ज्ञापन में कही गई है।

गठबंधन का दावा है कि 36 मैदानी सीटों पर 7,33,260 और 34 पर्वतीय सीटों पर 3,80,008 मतदाता कम हुए। फॉर्म-7 के तहत पूरे राज्य में 1,04,708 नाम हटाए गए। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि 70 में से 45 विधानसभा क्षेत्रों में हटाए गए मतदाताओं की संख्या 2022 के जीत के अंतर से ज्यादा रही। गठबंधन ने SIR का असर असमान और पक्षपातपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
इंडिया गठबंधन ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग की निष्पक्षता, स्वायत्तता और संवैधानिक दायित्व पर सवाल खड़े हुए हैं। ज्ञापन के अनुसार SIR जैसी संवेदनशील प्रक्रिया को अपारदर्शी ढंग से लागू किया गया, विपक्षी दलों और जनसंगठनों से प्रभावी परामर्श नहीं हुआ, फॉर्म-7 का दुरुपयोग हुआ और लाखों पात्र मतदाताओं को बिना समुचित सुनवाई के बाहर कर दिया गया। गठबंधन ने इन आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है।
ज्ञापन में सात मांगें रखी गई हैं। पहली मांग है कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया तुरंत शुरू हो और अनुच्छेद 324(5) के अनुरूप स्वतंत्र जांच आयोग गठित किया जाए। दूसरी, उत्तराखंड समेत जहां भी SIR लागू है, वहां इसे तत्काल निरस्त या स्थगित किया जाए। तीसरी, SIR से पहले की मूल मतदाता सूची बहाल हो और कटे सभी नामों की व्यक्तिगत सुनवाई, दस्तावेजी सत्यापन और न्यायिक निगरानी सुनिश्चित की जाए। चौथी, फॉर्म-7 से हटाए गए नामों की पारदर्शी जांच हो, खासकर उन शिकायतों की, जिनमें जीवित मतदाताओं को मृत या स्थानांतरित दिखाकर हटाने की बात कही गई है। पांचवीं, चुनाव आयोग सभी मान्यता प्राप्त दलों, जनसंगठनों और नागरिक समाज से परामर्श कर नई मतदाता सूची प्रक्रिया तैयार करे। छठी, आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव SIR रहित मूल मतदाता सूची पर कराए जाएं। सातवीं, नाम काटने की प्रक्रिया का स्वतंत्र न्यायिक निगरानी में सोशल ऑडिट हो।
प्रदर्शन में कांग्रेस, सीपीएम, सीपीआई, माले, सपा, सीटू, एसएफआई, इंसानियत मंच, एआईएलयू, किसान सभा, जनवादी महिला समिति और सर्वोदय मंडल समेत कई संगठनों के प्रतिनिधि और सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। सीपीएम से शिवप्रसाद देवली, लेखराज और अनन्त आकाश, कांग्रेस से सूर्यकांत धस्माना, जसविन्दर सिंह गोगी, शिशुपाल बिष्ट, जगदीश धीमान, सुनील जयसवाल और गरिमा धसोनी, सपा से एस एन सचान और हुसैन अहमद, सीपीआई से समर भण्डारी तथा सीपीआई (माले) से इन्द्रेश मैखुरी मौजूद रहे। इसके अलावा इंसानियत मंच से रवि चौपड़ा और त्रिलोचन भट्ट, सर्वोदय मंडल से हरबीर कुशवाहा, किसान सभा से सुरेंद्र सिंह सजवाण, गंगाधर नौटियाल, जाहिद अन्जुम और अमर बहादुर शाही, सीटू से एस एस नेगी, भगवन्त पयाल, कृष्ण गुनियाल, रविंद्र नौडियाल, हिमांशु चौहान और अभिषेक भण्डारी भी प्रदर्शन में शामिल थे। जनवादी महिला समिति से नुरैशा अंसारी, अंजलि पुरोहित, कुसुम नौडियाल, अनिता और शाकुम्भरी रावत, एआईएलयू से शम्भू प्रसाद ममगाई, अनुराधा, शान्ति और हिमांशु, एसएफआई से नितिन मलेठा और शैलेन्द्र नेगी, डीवाईएफआई से नितिन, चेतना से राजेंद्र शाह तथा कर्मचारी यूनियन से जगदीश कुकरेती भी मौजूद रहे।
गठबंधन ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण, संवैधानिक और लोकहितकारी बताया। उसने राष्ट्रपति से संविधान की रक्षा, स्वतंत्र चुनाव आयोग की गरिमा और नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा के लिए उचित संवैधानिक कदम उठाने की अपेक्षा जताई है।



