
लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग को लेकर ग्रामीणों का 44 दिन से चल रहा आंदोलन रविवार को उग्र हो गया। भारी बारिश और खराब मौसम के बावजूद हजारों की संख्या में ग्रामीण बिंदुखत्ता से लालकुआं तक जुलूस निकालते हुए प्रदर्शन में शामिल हुए।
वन अधिकार संगठन के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में ग्रामीण ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली, अन्य वाहनों और पैदल चलकर लालकुआं हाट बाजार प्रांगण में एकत्र हुए। जुलूस में मातृशक्ति, युवा, बुजुर्ग और पूर्व सैनिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बारिश के बीच भी ग्रामीणों में राजस्व गांव की मांग को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
ग्रामीणों का कहना है कि बिंदुखत्ता दशकों से राजस्व गांव के दर्जे की मांग कर रहा है। राजस्व गांव न होने के कारण उन्हें मूलभूत सुविधाओं, सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है। 44 दिनों से वे पदयात्रा और धरना-प्रदर्शन कर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।

कैबिनेट मंत्री ने दिया 15 दिन में हाई लेवल बैठक का आश्वासन
प्रदर्शन की सूचना पर मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में कैबिनेट मंत्री राम सिंह केड़ा मौके पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारी ग्रामीणों से राजस्व गांव से संबंधित पूरी जानकारी ली और मौके पर ही मुख्य सचिव से दूरभाष पर वार्ता की। मंत्री ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि 15 दिनों के भीतर इस मामले को लेकर हाई लेवल बैठक कराई जाएगी और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
सरकार को 5 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम, आमरण अनशन की चेतावनी
हालांकि ग्रामीणों ने सरकार के आश्वासन के साथ-साथ कड़ा रुख भी अपनाया है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार को 5 अक्टूबर तक बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की अधिसूचना जारी करने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में मांग पूरी नहीं हुई तो वे आमरण अनशन शुरू करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।




